लिए तैयार राजेश कुमार सिद्धार्थ
स्थान: सिधौली, जनपद सीतापुर
विशेष साक्षात्कार
सिधौली विधानसभा क्षेत्र में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं और अंबेडकर पार्कों की सुरक्षा को लेकर चल रहे आंदोलन ने अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। डॉ. अंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने इस मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी संदर्भ में उनसे विस्तृत बातचीत की गई, जिसमें उन्होंने अपने आंदोलन, सरकार पर आरोपों और भविष्य की रणनीति को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।
प्रश्न: सबसे पहले यह बताइए कि आपने यह आंदोलन क्यों शुरू किया?
राजेश कुमार सिद्धार्थ:
देखिए, यह आंदोलन कोई व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ के लिए नहीं है। यह आंदोलन बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सम्मान और उनके विचारों की रक्षा के लिए है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने स्वयं सार्वजनिक मंच से यह घोषणा की थी कि प्रदेश में जहां-जहां बाबा साहेब की प्रतिमाएं और अंबेडकर पार्क हैं, वहां उनकी सुरक्षा के लिए चारों ओर बाउंड्री वॉल और प्रतिमाओं के ऊपर छावनी का निर्माण कराया जाएगा। लेकिन आज चार महीने से अधिक समय बीत चुका है, और जमीनी स्तर पर कहीं कोई काम दिखाई नहीं दे रहा है।
इससे साफ जाहिर होता है कि या तो सरकार अपनी बात से मुकर रही है, या फिर यह केवल एक राजनीतिक जुमला था। हम यह जानना चाहते हैं कि आखिर उस घोषणा का क्या हुआ?
प्रश्न: आप सरकार पर “जुमला” कहने का आरोप लगा रहे हैं, क्या आपके पास इसके प्रमाण हैं?
राजेश कुमार सिद्धार्थ:
बिल्कुल हैं। अगर आप सिधौली विधानसभा क्षेत्र की बात करें, तो यहां लगभग हर गांव में अंबेडकर पार्क या प्रतिमा मौजूद है। लेकिन एक भी स्थान पर सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल या छावनी का निर्माण नहीं हुआ है। हमने खुद जाकर निरीक्षण किया है, लोगों से बातचीत की है, और हर जगह यही स्थिति है।
अगर सरकार ने काम किया होता, तो वह जमीन पर दिखता। लेकिन जब कुछ हुआ ही नहीं, तो सवाल उठाना हमारा अधिकार है।
प्रश्न: आपने 29 अप्रैल को 25,000 मोमबत्तियां जलाने की घोषणा की है, इसका उद्देश्य क्या है?
राजेश कुमार सिद्धार्थ:
यह केवल एक कार्यक्रम नहीं है, यह एक प्रतीकात्मक आंदोलन है। 29 अप्रैल को हम 25,000 मोमबत्तियां जलाकर बाबा साहेब अंबेडकर का जन्मोत्सव “प्रकाश महोत्सव” के रूप में मनाएंगे। इसका संदेश साफ है कि हम अंधेरे में नहीं रहेंगे, हम अपने अधिकारों और सम्मान के लिए जागरूक हैं।
यह कार्यक्रम सरकार को यह बताने के लिए है कि बहुजन समाज अब चुप नहीं बैठेगा।
प्रश्न: अगर इसके बाद भी सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती है, तो आपकी अगली रणनीति क्या होगी?
राजेश कुमार सिद्धार्थ:
हमने स्पष्ट कर दिया है कि अगर 30 मई तक सरकार ने अपनी घोषणा को पूरा नहीं किया, तो हम 29 अप्रैल से एक विशेष अभियान शुरू करेंगे। यह अभियान 1 मई से 30 मई तक चलेगा, जिसमें हम सिधौली विधानसभा के 470 बूथों पर पहुंचेंगे।
हम हर गांव, हर बूथ पर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे कि सरकार ने किस तरह उनके साथ धोखा किया है। हम दलित उत्पीड़न, सामाजिक अन्याय और सरकार की गलत नीतियों को उजागर करेंगे।
प्रश्न: आपने पदयात्रा की भी बात कही है, उसके बारे में बताइए।
राजेश कुमार सिद्धार्थ:
जी हां, 30 मई को मास्टरबाग से एक विशाल जनसभा होगी, जिसमें हजारों लोग शामिल होंगे। वहां से हम ग्राम पंच पीर में बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करेंगे और उसके बाद एक पदयात्रा शुरू करेंगे।
यह पदयात्रा सीधे लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास तक जाएगी। हमारा नारा होगा –
“या तो वादा पूरा करो या कुर्सी खाली करो”
यह आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से होगा, लेकिन इसमें हमारी आवाज बहुत मजबूत होगी।
प्रश्न: क्या आपको लगता है कि यह आंदोलन पूरे उत्तर प्रदेश में फैल सकता है?
राजेश कुमार सिद्धार्थ:
बिल्कुल। अगर सरकार ने हमारी मांगों को नजरअंदाज किया, तो यह आंदोलन सिर्फ सिधौली तक सीमित नहीं रहेगा। हम इसे पूरे उत्तर प्रदेश में ले जाएंगे और 2027 तक लगातार जन आंदोलन चलाएंगे।
हमारा लक्ष्य केवल एक है – बाबा साहेब के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं।
प्रश्न: आपने कहा कि “या तो सरकार मुझे मार दे या जेल भेज दे”, क्या यह बयान बहुत कठोर नहीं है?
राजेश कुमार सिद्धार्थ:
देखिए, यह कोई भावनात्मक बयान नहीं है, यह हमारे संघर्ष की गंभीरता को दर्शाता है। जब कोई व्यक्ति अपने समाज, अपने अधिकार और अपने महापुरुष के सम्मान के लिए लड़ता है, तो वह हर स्थिति के लिए तैयार रहता है।
मैं साफ कहना चाहता हूं कि हम डरने वाले नहीं हैं। अगर सरकार हमें दबाने की कोशिश करेगी, तो हम और मजबूती से लड़ेंगे।
प्रश्न: क्या आपने इस मुद्दे को प्रशासन के सामने भी उठाया है?
राजेश कुमार सिद्धार्थ:
जी हां, हमने उप जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया है और लगातार मांग पत्र दे रहे हैं। हमने प्रशासन से भी कहा है कि वह सरकार तक हमारी बात पहुंचाए।
लेकिन अगर प्रशासन भी चुप रहता है, तो हमें सड़कों पर उतरना ही पड़ेगा।
प्रश्न: आपका अंतिम संदेश क्या है सरकार और जनता के लिए?
राजेश कुमार सिद्धार्थ:
सरकार के लिए मेरा साफ संदेश है कि अगर बाबा साहेब अंबेडकर और संविधान के प्रति थोड़ी भी आस्था है, तो अपने वादे को तुरंत पूरा करें। बाउंड्री वॉल और छावनी का निर्माण कराएं और अंबेडकर पार्कों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
और जनता से मैं कहना चाहता हूं कि अब समय आ गया है कि हम अपने अधिकारों के लिए एकजुट हों। यह केवल एक नेता की लड़ाई नहीं है, यह पूरे समाज की लड़ाई है।
अगर हम आज नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।
निष्कर्ष:
राजेश कुमार सिद्धार्थ का यह आंदोलन अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक न्याय और सम्मान की बड़ी लड़ाई का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है और यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।

