महमूदाबाद (सीतापुर), सोमवार।
जनपद सीतापुर के महमूदाबाद ब्लॉक परिसर सोमवार को उस समय आंदोलन का केंद्र बन गया, जब भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारियों और सैकड़ों किसानों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। किसानों का आक्रोश इस कदर बढ़ा कि पूरे परिसर में “प्रशासन मुर्दाबाद” और “किसान विरोधी नीतियां बंद करो” जैसे नारों की गूंज सुनाई देती रही।
यह प्रदर्शन पूर्व में दिए गए ज्ञापन पर कार्रवाई न होने से नाराज किसानों द्वारा आयोजित किया गया। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने 19 तारीख तक समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इन मुद्दों को लेकर भड़का आक्रोश
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रमुख रूप से निम्न समस्याओं को उठाया—
* गौशालाओं में चारा और भूसे की समुचित व्यवस्था न होना
* ग्राम पंचायतों में खराब पड़े सरकारी हैंडपंपों की मरम्मत में लापरवाही
* ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति
* जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीन कार्यशैली
किसानों का कहना था कि इन समस्याओं से ग्रामीण जीवन प्रभावित हो रहा है और बार-बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं हो रहा।
नेतृत्व का तीखा हमला
भाकियू (टिकैत) के तहसील अध्यक्ष सम्मत कुमार वर्मा ने प्रशासन पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, “किसानों की समस्याओं को लेकर अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं होता। यह किसानों के साथ छल है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने ब्लॉक स्तर पर तैनात सचिव अर्जुन गुप्ता पर भी कार्य में लापरवाही और जानबूझकर हीलाहवाली करने का आरोप लगाया। इस आरोप के बाद कार्यकर्ताओं में खासा आक्रोश देखने को मिला और उन्होंने जमकर नारेबाजी की।
कई तहसीलों से पहुंचे पदाधिकारी
प्रदर्शन को व्यापक समर्थन मिला, जिसमें विभिन्न तहसीलों के पदाधिकारी शामिल हुए। प्रमुख रूप से महमूदाबाद ब्लॉक अध्यक्ष पवन कुमार वर्मा, बिसवां तहसील अध्यक्ष शिवराज समेत अन्य जिम्मेदार पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों की एकजुटता ने प्रदर्शन को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।
अल्टीमेटम से बढ़ा दबाव
धरने के दौरान तहसील अध्यक्ष ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दोपहर 2 बजे तक उनका ज्ञापन स्वीकार नहीं किया गया और मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी ब्लॉक प्रशासन की होगी।
प्रशासन की बढ़ी चिंता
प्रदर्शन के चलते ब्लॉक परिसर में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया। स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन सतर्क रहा और अधिकारियों ने किसानों से वार्ता के प्रयास भी किए। हालांकि समाचार लिखे जाने तक किसी ठोस समाधान की घोषणा नहीं हो सकी थी।
किसानों का साफ संदेश
इस आंदोलन ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि किसान अब अपनी समस्याओं को लेकर चुप बैठने वाले नहीं हैं। यदि समय रहते उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन जिले स्तर से प्रदेश स्तर तक फैल सकता है।

