मथुरा जिले के नगर पंचायत फरह कस्बे में सरकारी राशन के चावल की कालाबाजारी का मामला लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि नगर पंचायत कार्यालय के सामने स्थित एक दुकान से वर्षों से इस अवैध कारोबार को संचालित किया जा रहा है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों और आसपास के कोटेदारों का कहना है कि क्षेत्र में वितरित होने वाला सरकारी चावल बड़े पैमाने पर एक ही व्यापारी के पास पहुंच जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, यह चावल खुले बाजार में बेचा जाता है, जिससे सरकार की योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है।
मामले में जिस व्यापारी का नाम सामने आ रहा है, उसके बारे में लोगों का कहना है कि उसकी पहुंच उच्च स्तर तक है, जिसके कारण आज तक कोई अधिकारी उसके गोदाम तक जांच के लिए नहीं पहुंच सका। यही वजह है कि क्षेत्र में लोग खुलकर इस मुद्दे पर आवाज उठाने से भी कतराते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों के हक पर डाका डालने वालों पर रोक लग सके।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस गंभीर मामले को कितनी प्राथमिकता देता है और कब तक इस कालाबाजारी पर लगाम लगाई जाती है।
