गोरखपुर में राप्ती नदी एक बार फिर तीन परिवारों की खुशियां निगल गई। मंगलवार दोपहर गोरखनाथ थाना क्षेत्र के राजघाट इलाके में नहाने गए तीन मासूम किशोर अचानक नदी के गहरे पानी में समा गए। बच्चों को डूबता देख नदी किनारे चीख-पुकार मच गई, लेकिन तेज बहाव और गहराई के आगे लोग बेबस नजर आए। सूचना पर पहुंची पुलिस और एनडीआरएफ की टीम ने घंटों रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, जिसके बाद तीनों बच्चों के शव नदी से बरामद किए गए।
मृतकों की पहचान तुर्कमानपुर निवासी निक्कू (15) पुत्र सुनील, सत्ती (15) पुत्र मोहन और इरफान पुत्र फखरुद्दीन के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि तीनों किशोर मंगलवार दोपहर राप्ती नदी में नहाने पहुंचे थे। नहाते समय वे अनजाने में नदी के गहरे हिस्से में चले गए। तेज बहाव और गहराई का अंदाजा न होने के कारण तीनों पानी में डूबने लगे और देखते ही देखते लापता हो गए।
घटना के बाद नदी किनारे अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग बच्चों को बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन कोई भी गहरे पानी में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सका। मौके पर मौजूद लोगों की आंखों के सामने तीनों मासूम नदी में समा गए और लोग लाचार बनकर देखते रह गए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने नदी में सर्च ऑपरेशन शुरू किया और काफी मशक्कत के बाद तीनों बच्चों के शव बाहर निकाले गए। शव मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि पूरे इलाके में मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है।
लगातार हो रही डूबने की घटनाओं के बावजूद जिला प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राप्ती नदी के खतरनाक घाटों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। प्रशासन ने केवल चेतावनी बोर्ड लगाकर अपनी जिम्मेदारियों की पूर्ति कर ली है, जबकि हर साल यहां डूबने की कई घटनाएं सामने आती हैं। लोगों का कहना है कि अगर संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग, गोताखोरों की तैनाती और निगरानी की व्यवस्था होती तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
फिलहाल पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
