संघर्ष समिति गठित, जल संकट और पर्यावरणीय खतरे को लेकर जताई चिंता
बांदा, 07 जून। केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर बुंदेलखंड में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। रविवार को जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राजेश दीक्षित के आवास पर आयोजित बैठक में परियोजना के खिलाफ रणनीति तैयार की गई और 11 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन किया गया। सर्वसम्मति से डॉ. संजय द्विवेदी दनादन को समिति का जिला संयोजक बनाया गया।बैठक में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसानों और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने परियोजना के संभावित प्रभावों पर चर्चा की। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर पहाड़ों के दोहन, वृक्षों की कटाई और नदियों पर बांध निर्माण से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, जिसका असर बुंदेलखंड में बढ़ते तापमान और जल संकट के रूप में दिखाई दे रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि बांदा सहित पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र को भविष्य में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने क्षेत्र की जनता से परियोजना के विरोध में एकजुट होने और जनआंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया।बैठक में वर्तमान सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा गया कि विकास योजनाओं के नाम पर पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी की जा रही है। वक्ताओं का कहना था कि बुंदेलखंड पहले से ही सूखा और जल संकट जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे में परियोजना के प्रभावों का गंभीर अध्ययन आवश्यक है।
बैठक में कृष्णा गांधी, सुनंदा गांधी, दिव्या भारती, एआईसीसी सदस्य रमेश चन्द्र कोरी, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष सीमा खान एडवोकेट, पूर्व जिलाध्यक्ष साकेत बिहारी मिश्रा, संकटा प्रसाद त्रिपाठी, सत्यप्रकाश द्विवेदी एडवोकेट, शोएब रिजवी, सुन्दरलाल सुमन, मुमताज अली, रमेश चन्द्र दुबे, बी. लाल भाई, सन्तोष कुमार द्विवेदी, शिवप्रसाद भारती, अजय कुमार द्विवेदी, रामदत्त तिवारी, अखिलेश सिंह गौर सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
