दलितों पर बढ़ते अत्याचार भाजपा सरकार की सोची-समझी साजिश: विधायक परगट सिंह
नई दिल्ली। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं पंजाब के विधायक पद्मश्री परगट सिंह ने देशभर में दलित समुदाय पर बढ़ते अत्याचारों को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बीते दिनों देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई घटनाएं यह दर्शाती हैं कि दलित समाज को निशाना बनाने की एक सोची-समझी रणनीति चल रही है।
परगट सिंह ने कहा कि रायबरेली में एक दलित व्यक्ति की नृशंस हत्या, सुप्रीम कोर्ट के दलित जज पर हमला, और हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वी.ई. पूर्ण कुमार की आत्महत्या जैसी घटनाएं सिर्फ संयोग नहीं हैं, बल्कि एक सुनियोजित सामाजिक व राजनीतिक मानसिकता का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से साफ है कि देश में वंचित वर्गों के खिलाफ नफरत अपने चरम पर पहुंच चुकी है।
उन्होंने कहा, “जब एक आईपीएस अधिकारी को उसकी जाति के कारण अपमान और अत्याचार झेलना पड़ता है, तो सोचिए आम दलित नागरिक किन परिस्थितियों में जी रहा होगा। यह घटनाएं बताती हैं कि सामाजिक न्याय की भावना और संविधानिक अधिकारों की खुलेआम अवहेलना हो रही है।”
भाजपा की कथनी-करनी में बड़ा अंतर: परगट सिंह
कांग्रेस विधायक ने कहा कि भाजपा और आरएसएस की विचारधारा समाज को तोड़ने का काम कर रही है। “जो लोग बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान की रक्षा की कसमें खाते हैं, वही लोग आज संविधान के सिद्धांतों को सबसे ज्यादा चोट पहुँचा रहे हैं,” उन्होंने कहा।
परगट सिंह ने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी की “मनुवादी सोच” ने समाज को विषाक्त बना दिया है। उन्होंने कहा कि दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के साथ हो रहे अत्याचार और भेदभाव अब सामान्य बात बनते जा रहे हैं।
न्यायपालिका और पुलिस में भी बढ़ रहा जातिगत भेदभाव
परगट सिंह ने कहा कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, जो भारत के दूसरे दलित सीजेआई हैं, पर हुआ हमला यह संकेत देता है कि न्यायपालिका जैसी संस्थाएं भी अब जातीय घृणा से अछूती नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि जस्टिस गवई ने हाल में एक संवेदनशील याचिका को खारिज किया था, जिसके बाद उनके खिलाफ आपत्तिजनक बयान और हमले हुए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वी.ई. पूर्ण कुमार की आत्महत्या केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि यह सामाजिक ज़हर का परिणाम है। “जब एक उच्च पदस्थ अधिकारी को उसकी जाति के कारण उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, तो यह प्रशासनिक और संस्थागत विफलता का स्पष्ट प्रमाण है,” परगट सिंह ने कहा।
एससी/एसटी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की मांग
विधायक परगट सिंह ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों को राजनीतिक संरक्षण न मिल सके।
उन्होंने कहा, “यह बेहद जरूरी है कि सरकार केवल बयानबाजी न करे, बल्कि ठोस कदम उठाए। देश के संवैधानिक ढांचे की आत्मा — समानता और न्याय — को बचाने के लिए त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है।”
वंचित वर्ग न्याय की उम्मीद खो रहा है
परगट सिंह ने चिंता जताई कि देश में अब दलित, आदिवासी, पिछड़े और मुस्लिम समुदायों का भरोसा न्याय व्यवस्था से उठता जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर शीर्ष पदों पर बैठे दलित अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा और आरएसएस देश को किसी ऐसी स्थिति की ओर धकेलने की तैयारी में हैं, जहाँ सामाजिक एकता पूरी तरह टूट जाए। उन्होंने कहा, “जो लोग संविधान की रक्षा करने का दावा करते हैं, वही लोग आज संविधान के पहरेदारों को कमजोर कर रहे हैं।”
‘संविधान की आत्मा को बचाना जरूरी’
विधायक परगट सिंह ने कहा कि भारत का संविधान बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सपनों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अगर दलितों और वंचित वर्गों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव को नहीं रोका गया, तो यह संविधान की आत्मा को कमजोर करने जैसा होगा।
उन्होंने कहा, “अब वक्त आ गया है कि समाज इस अन्याय के खिलाफ एकजुट हो। यह केवल दलितों की लड़ाई नहीं, बल्कि यह पूरे भारत की आत्मा की लड़ाई है।”
निष्कर्षतः, परगट सिंह का यह बयान न केवल दलित अत्याचारों पर तीखी प्रतिक्रिया है, बल्कि यह भारतीय राजनीति में सामाजिक न्याय के सवाल को फिर से केंद्र में लाने का प्रयास भी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि एससी/एसटी एक्ट का सख्ती से पालन किया जाए, भेदभावपूर्ण मानसिकता पर नकेल कसी जाए और संविधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
