*सरयू तट से लेकर रामजानकी मार्ग तक डंपरों का तांडव
*पुलिस-प्रशासन मूकदर्शक, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
चन्द्रभान तिवारी
बड़हलगंज :शासन के सख्त निर्देशों और स्थानीय प्रशासन के दावों को धता बताते हुए बड़हलगंज क्षेत्र में बेलसडी,कोल्हुआ,चैनपुर, खड़ेसरी,दुबौली,पिडहनी में अवैध मिट्टी व बालू खनन का कारोबार चरम पर है।स्थिति यह है कि जिलाधिकारी के निरीक्षण और स्थानीय विधायक की गुहार के बाद भी खनन माफियाओं पर लगाम नहीं लग पा रही है।सरयू नदी तट से लेकर रामजानकी मार्ग के दर्जनों गाँवों में दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक लोडर,जेसीबी और डंपरों का तांडव जारी है। स्थानीय पुलिस व तहसील प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है, जिससे मिलीभगत के गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ___कोहड़ा भावर,दुबौली, तिवारीपुर,जाईपार,ओझवली, कोड़ारी और पोहिला जैसे गाँवों में नदियों के प्रतिबंधित क्षेत्रों से बालू का अवैध उठान अनवरत जारी है। ग्रामीणों में दहशत है कि बरसात में यदि नदी की धारा मुड़ी,तो पूरा इलाका जलमग्न हो सकता है।अवैध खनन में लगे ओवरलोड वाहनों ने बेलसडी, कोल्हुआ, टांडा, चैनपुर, नरहरपुर, खड़ेसरी, दुबौली, पिडहनी और मुजौना की सड़कों को छलनी कर दिया है।धूल के गुबार से बच्चों और बुजुर्गों का जीना मुहाल है। खनन माफिया एक खेत को इतना गहरा खोद देते हैं कि पड़ोसी किसान का खेत ढहने लगता है और वह भी औने-पौने दाम में मिट्टी बेचने को मजबूर हो जाता है।क्षेत्र में खनन माफियाओं का दुस्साहस इस कदर बढ़ चुका है कि उन्हें कानून का कोई खौफ नहीं है। विगत 13 जनवरी को तहसील गोला के नायब तहसीलदार रमाकांत चौहान पर चेकिंग के दौरान डम्पर चढ़ाकर हत्या का प्रयास किया जा चुका है।अभी दो दिन पहले ही बेलसडी गांव में भारी विरोध के बाद प्रशासन ने एक लोडर सीज किया था, लेकिन कार्रवाई के चंद घंटों बाद ही फिर से धड़ल्ले से खनन शुरू हो गया। आक्रोशित ग्रामीणों का आरोप है कि खनन करने वाले खुलेआम थाने पर उठते-बैठते हैं,जिससे साठगांठ की साफ बू आती है। ग्रामीणों ने दोषियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की है।अवैध खनन के कारण क्षेत्र में पहले भी लहू बह चुका है। बीते वर्ष रूदौली गांव में ट्रैक्टर-ट्राली से अवैध मिट्टी ले जा रहे दबंगों ने अश्लील गाने बजाने का विरोध करने पर राजकिशोर नाम के व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस सनसनीखेज वारदात के बाद भी पुलिस और खनन विभाग की नींद नहीं टूट रही है।प्रशासनिक दावों में कार्रवाई की बात तो कही जाती है, लेकिन धरातल पर इसका असर शून्य है।
