अर्जुन रौतेला आगरा। साहित्य साधिका समिति, आगरा की जून माह की मासिक संगोष्ठी रविवार को नागरी प्रचारिणी सभा के पुस्तकालय भवन में आयोजित हुई। संगोष्ठी में पर्यावरण संरक्षण, योग, वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई तथा महाराणा प्रताप के जीवन और आदर्शों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
साधना वैद ने पर्यावरण संरक्षण के लिए उपहार स्वरूप पौधे और फलों की डलिया भेंट करने का सुझाव देते हुए प्रदूषण पर व्यंग्यात्मक कविता सुनाई। डॉ. सुषमा सिंह ने हाइकु के माध्यम से बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई, जबकि डॉ. रेखा कक्कड़ ने पर्यावरण को मानव के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का आधार बताया। आभा चतुर्वेदी ने मानसिक प्रदूषण दूर कर सकारात्मक सोच और परोपकार की भावना अपनाने का आह्वान किया। रमा रश्मि ने हरितिमा के संरक्षण पर प्रभावशाली कविता प्रस्तुत की। सुमन शुक्ला ने कहा कि बाहरी पर्यावरण की शुद्धता के लिए पहले आंतरिक प्रदूषण को समाप्त करना आवश्यक है। सुषमा पाल ने महारानी लक्ष्मीबाई के किले से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग साझा किए।
डॉ. नीलम भटनागर ने योग को भारतीय जीवन शैली, विज्ञान और दर्शन का समन्वित स्वरूप बताया। मीरा परिहार ने महारानी लक्ष्मीबाई पर ओजपूर्ण कविता प्रस्तुत की, जबकि डॉ. अलका चौधरी ने महाराणा प्रताप के स्वाभिमान, राष्ट्रप्रेम और संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार रमा वर्मा श्याम का रमा रश्मि द्वारा शॉल, तुलसी का पौधा एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया। मंजु स्वांति ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए बाँस एवं नीम से बने टूथब्रश वितरित किए।
दूसरे सत्र की काव्य गोष्ठी में मंजु स्वांति ने पर्यावरण प्रदूषण पर आधारित रचनाएँ प्रस्तुत कीं, जबकि रमा वर्मा श्याम ने महारानी लक्ष्मीबाई के शौर्य का काव्यमय चित्रण करने के साथ लोकगीत की प्रस्तुति देकर खूब सराहना बटोरी। अंत में सभी साहित्यकारों ने पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
