उपनिबंधन कार्यालय पर जड़ा ताला, सरकार की नीति को बताया जनविरोधी।
सहजनवां गोरखपुर। सहजनवा रजिस्ट्री विभाग के निजीकरण और उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा-34 के तहत ऑनलाइन आपत्ति व निस्तारण के शासनादेश के विरोध में सहजनवां तहसील के अधिवक्ताओं एवं दस्तावेज लेखकों का आंदोलन पांचवें दिन भी पूरे आवेग के साथ जारी रहा।
आक्रोशित अधिवक्ताओं ने तहसील भवन के द्वितीय तल पर स्थित उप निबंधन कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया और जोरदार नारेबाजी करते हुए शासनादेश को तत्काल वापस लेने की मांग की। विरोध के चलते रजिस्ट्री से जुड़े सभी न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्य पूरी तरह ठप हो गए, जिससे आमजन को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
अधिवक्ताओं एवं दस्तावेज लेखकों ने आरोप लगाया कि विकास का दावा करने वाली सरकार जन-आकांक्षाओं को सुनने के लिए तैयार नहीं है।उनका कहना है कि यह आदेश आम नागरिकों को सुलभ एवं त्वरित न्याय से वंचित करेगा और शिक्षित युवाओं को बेरोजगारी के गर्त में धकेल देगा। इसे सुनियोजित नीति बताते हुए उन्होंने शासनादेश को अविलंब निरस्त करने की मांग दोहराई।
बार एसोसिएशन अध्यक्ष कृष्ण कुमार त्रिपाठी एडवोकेट ने कहा कि रजिस्ट्री विभाग का निजीकरण होने से न केवल हजारों अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक बेरोजगार हो जाएंगे, बल्कि आम जनता को भी अनावश्यक कठिनाइयों से जूझना पड़ेगा। निजी क्षेत्र के हाथों में व्यवस्था जाने से पारदर्शिता एवं जवाबदेही समाप्त हो जाएगी, जिससे भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण मिलेगा।
मंत्री राघवेंद्र सिंह, अध्यक्ष के के तिवारी, भूतपूर्व मंत्री अनिल त्रिपाठी, अभिषेक मणि त्रिपाठी,सतीश कनौजिया, गणेश कनौजिया, रमाकांत उपाध्याय, रंगनाथ पांडेय, बुद्धि सागर, ज्ञानेंद्र यादव, विजय प्रताप सिंह ने ऑनलाइन आपत्ति और निस्तारण की व्यवस्था को अव्यावहारिक, असंवैधानिक और जनहित के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचलों में आज भी इंटरनेट की पहुंच और तकनीकी साक्षरता का घोर अभाव है। ऐसे में केवल ऑनलाइन प्रक्रिया थोपना गरीब, वंचित और अशिक्षित वर्ग को न्याय से दूर करने का प्रयास है।
अधिवक्ताओं एवं दस्तावेज लेखकों ने मुख्यमंत्री से निजीकरण के प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करने की पुरजोर अपील की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए आदेश वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा। इस मुद्दे को लेकर अधिवक्ता समाज के साथ-साथ आम जनता में भी गहरा आक्रोश व्याप्त है।विरोध प्रदर्शन में दस्तावेज लेखक अजय चौबे, अश्वनी शुक्ला, सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि न्याय प्रक्रिया को सरल, सुगम और जनसुलभ बनाया जाना चाहिए, न कि उसे जटिल बनाकर आम आदमी की पहुंच से दूर किया जाए।
