डॉ. बलराम ने सुप्रीम कोर्ट में मैनुअल स्कैवेंजिंग और खतरनाक तरीके से सीवर की सफाई को रोकने के लिए एक याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए पांच राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना नोटिस जारी किए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला ढोने) की वजह से होने वाली मौतों के मामलों में पांच राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना नोटिस जारी किए हैं. नोटिस में कोर्ट ने पूछा है कि मैनुअल स्कैवेंजिंग से होने वाली मौतों को रोकने में नाकाम रहने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए. सुप्रीम कोर्ट ने सभी को 4 हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया
डॉ. बलराम ने सुप्रीम कोर्ट में मैनुअल स्कैवेंजिंग और खतरनाक तरीके से सीवर की सफाई को रोकने के लिए एक याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि 20 अक्टूबर, 2023 के फैसले और उसके बाद दिए गए निर्देशों के बावजूद, सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मौतें हो रही हैं. इसे देखते हुए कोर्ट ने पांच राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना नोटिस जारी किए. इससे पहले, अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रथा को खत्म करने के निर्देश दिए थे और सीवर से जुड़ी मौतों के लिए मुआवजा राशि बढ़ाकर ₹30 लाख कर दी थी.
2025 में 46 और 2024 में 54 मौतें
इसके बाद, कोर्ट ने छह महानगरों में मैनुअल स्कैवेंजिंग और सीवर की सफाई पर पूरी तरह रोक लगा दी थी. सोमवार को जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने अब तक हुई प्रगति के आधार पर मामले की सुनवाई की. सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर (एमिकस क्यूरी) ने कहा कि 2023 के फैसले और उसके बाद के निर्देशों के बावजूद मौतें हो रही हैं. संसद में एक ‘स्टार्ड क्वेश्चन’ के जवाब में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 46 और 2024 में 54 मौतें हुईं.
4 हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
खास राज्यों की बात करें तो उन्होंने बताया कि 2024 में महाराष्ट्र में 17, तमिलनाडु में 12 और राजस्थान में 13 मौतें हुईं. अन्य राज्यों में गुजरात और उत्तर प्रदेश भी शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और विपुल एम पंचोली की पीठ ने बिहार, दिल्ली, गोवा, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिवों को अवमानना नोटिस भेजा है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी को 4 हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया

