किसानों को सरकार दे फसल का मुआवजा : राजेश कुमार सिद्धार्थ
भारी वर्षा से धान की फसल बर्बाद, सिधौली के किसान आर्थिक संकट में — कांग्रेस नेता बोले, भाजपा सरकार किसानों की सुध नहीं ले रही
सिधौली (जनपद सीतापुर)।
सिधौली विधानसभा क्षेत्र (152) के अंतर्गत आने वाले अनेक गांवों में हाल की भारी वर्षा और अनियमित मौसम के कारण किसानों की फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं। खेतों में खड़ी धान की फसल जलमग्न हो चुकी है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। इसी पृष्ठभूमि में किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने सिधौली ब्लॉक मुख्यालय पर एक बड़ी किसान सभा को संबोधित किया और सरकार से तात्कालिक राहत एवं मुआवजा वितरण की मांग की।
सभा में सैकड़ों किसानों, महिला कृषक समूहों, स्थानीय कार्यकर्ताओं और कांग्रेस समर्थकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन क्षेत्रीय संयोजक महेंद्र प्रताप गौतम ने किया। सभा में ग्रामीणों ने खुले तौर पर कहा कि इस वर्ष की बरसात ने उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर बीज, खाद और डीजल खरीदा था, लेकिन अब फसल के नुकसान से वे बकाया चुकाने में असमर्थ हैं।
फसल बर्बादी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट
सिधौली, मछरेहटा, सिधौना और बिसवां तहसीलों के कई हिस्सों में सितंबर-अक्टूबर माह की अनवरत वर्षा के कारण खेतों में जलभराव की स्थिति बनी रही। जिन किसानों ने धान की रोपाई जुलाई में की थी, उनकी फसलें पूरी तरह गिर चुकी हैं। पशुओं के चारे की भी कमी हो गई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह रुक गया है, जिससे मजदूरों और खेतिहर परिवारों की स्थिति बिगड़ती जा रही है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि “किसानों की फसल बर्बाद होना केवल व्यक्तिगत नुकसान नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की रीढ़ पर चोट है। अगर किसान कमजोर होगा तो देश की खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी।” उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए थे — किसानों की आय दोगुनी करने, लागत का डेढ़ गुना मूल्य देने और हर खेत को पानी पहुंचाने की बात कही थी, लेकिन आज न तो उचित मूल्य मिल रहा है, न सहायता राशि।
भाजपा सरकार पर तगड़ा हमला
सभा को संबोधित करते हुए राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा, “यह सरकार किसानों की नहीं, पूंजीपतियों की सरकार है। जब अडानी-अंबानी को हजारों करोड़ की राहत दी जाती है, तब सरकार के पास किसानों के लिए पैसे नहीं रहते। क्या यह न्याय है?”
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भी ओलावृष्टि और बाढ़ से किसानों की फसलें नष्ट हुई थीं, परंतु आज तक बहुत कम किसानों को मुआवजा मिला। अनेक गांवों में नाम सर्वे में शामिल ही नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रभावित गांवों का पुनः सर्वे कराना चाहिए, ताकि प्रत्येक किसान को वास्तविक नुकसान के अनुसार मुआवजा मिले।
राजेश सिद्धार्थ ने उदाहरण देते हुए कहा कि सिधौली ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिपरी खुर्द, रामपुर, गंगापुर, मल्हेपुर, बरौली और पकड़ी जैसे गांवों में धान की पूरी फसल पानी में सड़ गई है। किसानों ने 15-20 हजार रुपये प्रति बीघा लागत लगाई थी, लेकिन अब एक दाना भी नहीं बचा। उन्होंने कहा कि सरकार यदि तीन दिन के भीतर सर्वे नहीं कराती तो किसान कांग्रेस क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन शुरू करेगी।
किसानों की आय दोगुनी का वादा हुआ जुमला
सिद्धार्थ ने कहा कि भाजपा सरकार ने 2017 और 2022 के चुनाव में किसानों को यह कहकर भ्रमित किया कि उनकी आय 2022 तक दोगुनी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि “आज किसान की आय दोगुनी तो क्या, आधी रह गई है। डीजल, खाद, बीज, बिजली, दवाई सब महंगे हो गए हैं। समर्थन मूल्य बढ़ा नहीं, उल्टे खरीद केंद्र समय से नहीं खुलते। किसान मजबूर होकर औने-पौने दाम पर फसल बेचने को विवश है।”
उन्होंने कहा कि सरकार का कृषि बजट हर साल घट रहा है जबकि विज्ञापन और प्रचार पर खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसानों के हित में घोषित कई योजनाएँ कागजों में सीमित हैं, जैसे ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’, जिसके तहत अधिकांश किसान बीमा कंपनी के मुनाफे का हिस्सा बन गए हैं।
कांग्रेस किसानों की आवाज उठाएगी
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों की आवाज बनकर लड़ेगी। उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही सिधौली, बिसवां और महमूदाबाद ब्लॉकों में “किसान अधिकार यात्रा” निकाली जाएगी। इस यात्रा के माध्यम से गांव-गांव जाकर किसानों को संगठित किया जाएगा ताकि उनकी समस्याओं को जिला मुख्यालय और विधानसभा तक पहुंचाया जा सके।
उन्होंने कहा, “हम सरकार से मांग करते हैं कि सभी तहसीलों में राजस्व निरीक्षक और कृषि विभाग की संयुक्त टीम बनाकर नुकसान का आकलन करे, और प्रति बीघा कम से कम 15 हजार रुपये मुआवजा दे। जिन किसानों के पास बीमा नहीं है, उन्हें भी विशेष राहत पैकेज में शामिल किया जाए।”
सभा में उठे अन्य मुद्दे
सभा में किसानों ने खाद वितरण में भ्रष्टाचार, बिजली बिलों में अत्यधिक वृद्धि, सिंचाई नहरों में पानी की कमी, और सरकारी खरीद केंद्रों में उत्पीड़न की शिकायतें भी रखीं।
ग्राम गंगापुर के किसान रामसजीवन यादव ने कहा कि “हमारी धान की फसल पूरी तरह डूब गई, लेकिन लेखपाल ने सर्वे में नाम ही नहीं लिखा।”
वहीं, सरोजिनी देवी नामक महिला किसान ने कहा कि “हमने खेत में 20 हजार का निवेश किया था, लेकिन अब खाने को भी धान नहीं बचा। सरकार मदद नहीं दे रही।”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने इन शिकायतों पर आश्वासन दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से जिलाधिकारी और कृषि विभाग को ज्ञापन सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि “किसान कांग्रेस हर प्रभावित किसान का साथ देगी, चाहे प्रशासन सुनवाई करे या न करे।”
राजनीतिक चेतावनी — 2027 में किसान देंगे जवाब
सभा के अंत में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने चेतावनी देते हुए कहा कि “यदि भाजपा सरकार किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाती, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में किसान मुंहतोड़ जवाब देंगे। अब किसान ठगा नहीं जाएगा। जिसने हमारी फसल बर्बादी पर आंख मूंद ली, उसे हम सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएंगे।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी आगामी चुनाव में किसानों, मजदूरों और युवाओं के मुद्दों को लेकर चुनावी एजेंडा बनाएगी। किसानों की नीतियों को लेकर एक “कृषि घोषणा पत्र” तैयार किया जा रहा है, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने, बीमा योजना में पारदर्शिता लाने, और ग्रामीण क्रेडिट प्रणाली को आसान बनाने की बात शामिल होगी।
प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
सभा के बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने ब्लॉक मुख्यालय पहुंचकर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सिधौली को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि सभी ग्राम पंचायतों में राजस्व टीम भेजी जाए और प्रभावित किसानों की सूची तैयार की जाए। साथ ही, फसल बीमा योजना के अंतर्गत जिन किसानों ने प्रीमियम भरा है, उन्हें 15 दिनों के भीतर मुआवजा दिया जाए।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यदि 30 नवंबर तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो किसान कांग्रेस धरना आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि “यह आंदोलन किसानों के सम्मान की रक्षा के लिए है, किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं।”
भविष्य की कार्ययोजना
किसान कांग्रेस के नेतृत्व में आगामी दिसंबर माह से “किसान जागरूकता अभियान” चलाने की घोषणा की गई। इस अभियान के तहत प्रत्येक गांव में कार्यकर्ता किसानों को उनके अधिकार, बीमा योजना की प्रक्रिया और सरकारी राहत पाने की कानूनी जानकारी देंगे। इसके अलावा, जिला मुख्यालय पर “किसान हेल्प डेस्क” की स्थापना की जाएगी, जहां किसान अपनी समस्याओं का पंजीकरण करा सकेंगे।
निष्कर्ष
राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व में आयोजित यह सभा केवल फसल मुआवजे की मांग तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह किसानों की व्यापक समस्याओं और सरकार की जवाबदेही पर केंद्रित रही। वक्ताओं ने साफ कहा कि जब तक किसान सशक्त नहीं होगा, तब तक देश की अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।
सभा का समापन किसान गीत “जय जवान, जय किसान” के साथ हुआ और उपस्थित सभी किसानों ने संकल्प लिया कि वे अपनी एकता बनाए रखेंगे और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।
– राजेश कुमार सिद्धार्थ
प्रदेश उपाध्यक्ष, किसान कांग्रेस उत्तर प्रदेश
राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ
स्थान : सिधौली, जनपद सीतापुर
भारी वर्षा से धान की फसल बर्बाद, सिधौली के किसान आर्थिक संकट में — कांग्रेस नेता बोले, भाजपा सरकार किसानों की सुध नहीं ले रही
सिधौली (जनपद सीतापुर)।
सिधौली विधानसभा क्षेत्र (152) के अंतर्गत आने वाले अनेक गांवों में हाल की भारी वर्षा और अनियमित मौसम के कारण किसानों की फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं। खेतों में खड़ी धान की फसल जलमग्न हो चुकी है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। इसी पृष्ठभूमि में किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने सिधौली ब्लॉक मुख्यालय पर एक बड़ी किसान सभा को संबोधित किया और सरकार से तात्कालिक राहत एवं मुआवजा वितरण की मांग की।
सभा में सैकड़ों किसानों, महिला कृषक समूहों, स्थानीय कार्यकर्ताओं और कांग्रेस समर्थकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन क्षेत्रीय संयोजक महेंद्र प्रताप गौतम ने किया। सभा में ग्रामीणों ने खुले तौर पर कहा कि इस वर्ष की बरसात ने उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर बीज, खाद और डीजल खरीदा था, लेकिन अब फसल के नुकसान से वे बकाया चुकाने में असमर्थ हैं।
फसल बर्बादी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट
सिधौली, मछरेहटा, सिधौना और बिसवां तहसीलों के कई हिस्सों में सितंबर-अक्टूबर माह की अनवरत वर्षा के कारण खेतों में जलभराव की स्थिति बनी रही। जिन किसानों ने धान की रोपाई जुलाई में की थी, उनकी फसलें पूरी तरह गिर चुकी हैं। पशुओं के चारे की भी कमी हो गई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह रुक गया है, जिससे मजदूरों और खेतिहर परिवारों की स्थिति बिगड़ती जा रही है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि “किसानों की फसल बर्बाद होना केवल व्यक्तिगत नुकसान नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की रीढ़ पर चोट है। अगर किसान कमजोर होगा तो देश की खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी।” उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए थे — किसानों की आय दोगुनी करने, लागत का डेढ़ गुना मूल्य देने और हर खेत को पानी पहुंचाने की बात कही थी, लेकिन आज न तो उचित मूल्य मिल रहा है, न सहायता राशि।
भाजपा सरकार पर तगड़ा हमला
सभा को संबोधित करते हुए राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा, “यह सरकार किसानों की नहीं, पूंजीपतियों की सरकार है। जब अडानी-अंबानी को हजारों करोड़ की राहत दी जाती है, तब सरकार के पास किसानों के लिए पैसे नहीं रहते। क्या यह न्याय है?”
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भी ओलावृष्टि और बाढ़ से किसानों की फसलें नष्ट हुई थीं, परंतु आज तक बहुत कम किसानों को मुआवजा मिला। अनेक गांवों में नाम सर्वे में शामिल ही नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रभावित गांवों का पुनः सर्वे कराना चाहिए, ताकि प्रत्येक किसान को वास्तविक नुकसान के अनुसार मुआवजा मिले।
राजेश सिद्धार्थ ने उदाहरण देते हुए कहा कि सिधौली ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिपरी खुर्द, रामपुर, गंगापुर, मल्हेपुर, बरौली और पकड़ी जैसे गांवों में धान की पूरी फसल पानी में सड़ गई है। किसानों ने 15-20 हजार रुपये प्रति बीघा लागत लगाई थी, लेकिन अब एक दाना भी नहीं बचा। उन्होंने कहा कि सरकार यदि तीन दिन के भीतर सर्वे नहीं कराती तो किसान कांग्रेस क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन शुरू करेगी।
किसानों की आय दोगुनी का वादा हुआ जुमला
सिद्धार्थ ने कहा कि भाजपा सरकार ने 2017 और 2022 के चुनाव में किसानों को यह कहकर भ्रमित किया कि उनकी आय 2022 तक दोगुनी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि “आज किसान की आय दोगुनी तो क्या, आधी रह गई है। डीजल, खाद, बीज, बिजली, दवाई सब महंगे हो गए हैं। समर्थन मूल्य बढ़ा नहीं, उल्टे खरीद केंद्र समय से नहीं खुलते। किसान मजबूर होकर औने-पौने दाम पर फसल बेचने को विवश है।”
उन्होंने कहा कि सरकार का कृषि बजट हर साल घट रहा है जबकि विज्ञापन और प्रचार पर खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसानों के हित में घोषित कई योजनाएँ कागजों में सीमित हैं, जैसे ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’, जिसके तहत अधिकांश किसान बीमा कंपनी के मुनाफे का हिस्सा बन गए हैं।
कांग्रेस किसानों की आवाज उठाएगी
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों की आवाज बनकर लड़ेगी। उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही सिधौली, बिसवां और महमूदाबाद ब्लॉकों में “किसान अधिकार यात्रा” निकाली जाएगी। इस यात्रा के माध्यम से गांव-गांव जाकर किसानों को संगठित किया जाएगा ताकि उनकी समस्याओं को जिला मुख्यालय और विधानसभा तक पहुंचाया जा सके।
उन्होंने कहा, “हम सरकार से मांग करते हैं कि सभी तहसीलों में राजस्व निरीक्षक और कृषि विभाग की संयुक्त टीम बनाकर नुकसान का आकलन करे, और प्रति बीघा कम से कम 15 हजार रुपये मुआवजा दे। जिन किसानों के पास बीमा नहीं है, उन्हें भी विशेष राहत पैकेज में शामिल किया जाए।”
सभा में उठे अन्य मुद्दे
सभा में किसानों ने खाद वितरण में भ्रष्टाचार, बिजली बिलों में अत्यधिक वृद्धि, सिंचाई नहरों में पानी की कमी, और सरकारी खरीद केंद्रों में उत्पीड़न की शिकायतें भी रखीं।
ग्राम गंगापुर के किसान रामसजीवन यादव ने कहा कि “हमारी धान की फसल पूरी तरह डूब गई, लेकिन लेखपाल ने सर्वे में नाम ही नहीं लिखा।”
वहीं, सरोजिनी देवी नामक महिला किसान ने कहा कि “हमने खेत में 20 हजार का निवेश किया था, लेकिन अब खाने को भी धान नहीं बचा। सरकार मदद नहीं दे रही।”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने इन शिकायतों पर आश्वासन दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से जिलाधिकारी और कृषि विभाग को ज्ञापन सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि “किसान कांग्रेस हर प्रभावित किसान का साथ देगी, चाहे प्रशासन सुनवाई करे या न करे।”
राजनीतिक चेतावनी — 2027 में किसान देंगे जवाब
सभा के अंत में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने चेतावनी देते हुए कहा कि “यदि भाजपा सरकार किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाती, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में किसान मुंहतोड़ जवाब देंगे। अब किसान ठगा नहीं जाएगा। जिसने हमारी फसल बर्बादी पर आंख मूंद ली, उसे हम सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएंगे।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी आगामी चुनाव में किसानों, मजदूरों और युवाओं के मुद्दों को लेकर चुनावी एजेंडा बनाएगी। किसानों की नीतियों को लेकर एक “कृषि घोषणा पत्र” तैयार किया जा रहा है, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने, बीमा योजना में पारदर्शिता लाने, और ग्रामीण क्रेडिट प्रणाली को आसान बनाने की बात शामिल होगी।
प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
सभा के बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने ब्लॉक मुख्यालय पहुंचकर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सिधौली को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि सभी ग्राम पंचायतों में राजस्व टीम भेजी जाए और प्रभावित किसानों की सूची तैयार की जाए। साथ ही, फसल बीमा योजना के अंतर्गत जिन किसानों ने प्रीमियम भरा है, उन्हें 15 दिनों के भीतर मुआवजा दिया जाए।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यदि 30 नवंबर तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो किसान कांग्रेस धरना आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि “यह आंदोलन किसानों के सम्मान की रक्षा के लिए है, किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं।”
भविष्य की कार्ययोजना
किसान कांग्रेस के नेतृत्व में आगामी दिसंबर माह से “किसान जागरूकता अभियान” चलाने की घोषणा की गई। इस अभियान के तहत प्रत्येक गांव में कार्यकर्ता किसानों को उनके अधिकार, बीमा योजना की प्रक्रिया और सरकारी राहत पाने की कानूनी जानकारी देंगे। इसके अलावा, जिला मुख्यालय पर “किसान हेल्प डेस्क” की स्थापना की जाएगी, जहां किसान अपनी समस्याओं का पंजीकरण करा सकेंगे।
निष्कर्ष
राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व में आयोजित यह सभा केवल फसल मुआवजे की मांग तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह किसानों की व्यापक समस्याओं और सरकार की जवाबदेही पर केंद्रित रही। वक्ताओं ने साफ कहा कि जब तक किसान सशक्त नहीं होगा, तब तक देश की अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।
सभा का समापन किसान गीत “जय जवान, जय किसान” के साथ हुआ और उपस्थित सभी किसानों ने संकल्प लिया कि वे अपनी एकता बनाए रखेंगे और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।
– राजेश कुमार सिद्धार्थ
प्रदेश उपाध्यक्ष, किसान कांग्रेस उत्तर प्रदेश
राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ
स्थान : सिधौली, जनपद सीतापुर
