ब्यूरो रवि कुमार साहू
लोकेशन छत्तीसगढ़
जिला बालोद
"बालोद के अरकर गांव में पुलिस की मिलीभगत से फल-फूल रहा नशे का साम्राज्य — कानून के रखवाले बने सौदागर, अपराधी दिलीप कोसरे बना नशे के अंधेरे कारोबार का सरगना"
बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के थाना सनौद के अरकर गांव में नशे का अवैध कारोबार इस कदर फैल चुका है कि अब यह गांव “शराब और गांजे के खुले बाजार” के नाम से कुख्यात होता जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब प्रशासन और पुलिस की आंखों के सामने हो रहा है। जिस विभाग को इस अपराध को रोकना चाहिए, वही आज इसकी जड़ों को सींचने में लगा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पुलिस की मिलीभगत से यह धंधा दिन-ब-दिन मजबूत होता जा रहा है, और गांव के युवा इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं।अरकर गांव में शराब और गांजे की खुलेआम बिक्री ने सामाजिक ढांचे को तोड़कर रख दिया है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चे नशे की गिरफ्त में फंस रहे हैं, जबकि अभिभावक प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं। गांव की गलियों में रोजाना शाम ढलते ही अवैध शराब और मादक पदार्थों की सप्लाई होती है, जिसे रोकने की जिम्मेदारी निभाने के बजाय पुलिसकर्मी मूकदर्शक बन बैठे हैं। कहा जा रहा है कि कुछ वर्दीधारी अधिकारी इस गंदे कारोबार से ‘मासिक हिस्सा’ लेकर आंख मूंदे बैठे हैं।इस अवैध व्यापार का सबसे बड़ा गुनहगार बताया जा रहा है दिलीप कोसरे, जो गांव में नशे का मुख्य सौदागर बन चुका है। उसके इशारों पर कई स्थानीय गुर्गे काम कर रहे हैं, जो शराब और गांजे की अवैध डिलीवरी संभालते हैं। शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन जानबूझकर इस गुनाह को बढ़ावा दे रहा है? क्या जनता की सुरक्षा अब पैसों के सौदे में बिक चुकी है?अरकर गांव का माहौल अब भय और लाचारी से भरा हुआ है। गांव की महिलाएं व बुजुर्ग इस बुराई से मुक्ति की मांग कर रहे हैं, परंतु पुलिस प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। यदि इसी तरह यह नशे का जाल फैला रहा, तो आने वाले समय में बालोद का यह इलाका अपराध का गढ़ बन जाएगा।अब ज़रूरत है कि जिला प्रशासन, आबकारी विभाग और उच्च पुलिस अधिकारी तत्काल कार्रवाई कर इस काले धंधे पर लगाम लगाएं। वरना अरकर गांव सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि नशे की बर्बादी की मिसाल बनकर रह जाएगा।

