यह सिर्फ आंदोलन नहीं, किसान की पुकार है” — किसान कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ
सीतापुर, 2 नवम्बर 2025।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद की 152 विधानसभा सिधौली में किसानों ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। धान की फसल बर्बाद होने और सरकारी उदासीनता के विरोध में किसान कांग्रेस के बैनर तले आज सैकड़ों किसान एकत्र हुए। आंदोलन का नेतृत्व किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने किया।
प्रदर्शन स्थल पर जब उन्होंने कहा —
“यह सिर्फ आंदोलन नहीं, किसान की पुकार है”,
तो यह वाक्य किसानों की भीगी आंखों और टूटी उम्मीदों का स्वर बन गया।
वर्षा से चौपट फसल, किसानों पर दोहरी मार
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में हुई मूसलाधार वर्षा ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। 26 से 29 अक्टूबर 2025 तक लगातार हुई बरसात ने खेतों को दलदल बना दिया, धान की तैयार फसलें पूरी तरह सड़ गईं। हजारों किसानों के सपने मिट्टी में मिल गए।
प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “किसानों की स्थिति इतनी खराब है कि अब उनके पास न खाने को अनाज बचा है, न अगली फसल के लिए पूंजी। खेती की लागत बढ़ चुकी है, डीजल और खाद महंगी है, और जब फसल तैयार हुई तो प्रकृति की मार ने सबकुछ छीन लिया।”
उन्होंने आगे कहा, “सरकार की संवेदनहीनता अब असहनीय हो चुकी है। आज जब किसान रो रहा है, उसके घर चूल्हे ठंडे हैं, उस वक्त भी सरकार के मंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंकड़ों के खेल खेल रहे हैं। यह किसानों के साथ अन्याय नहीं, बल्कि अपमान है।”
“सरकार सो रही है, किसान जाग चुका है”
सिधौली के उपजिलाधिकारी कार्यालय के बाहर सैकड़ों किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा। किसान कांग्रेस के झंडे और तख्तियां लिए किसान “अपना हक लेकर रहेंगे”, “कर्ज माफी दो, मुआवजा दो”, “राजेश कुमार सिद्धार्थ तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं” जैसे नारे लगा रहे थे।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने अपने भाषण में कहा —
“आज किसान सड़कों पर इसलिए नहीं उतरा कि उसे राजनीति करनी है। वह इसलिए उतरा है क्योंकि उसका पेट खाली है, उसका घर अंधेरे में डूबा है। हम सरकार को जगाने आए हैं। सरकार सो रही है, लेकिन किसान अब जाग चुका है।”
किसानों की समस्याएँ — दर्द और धरातल का सच
प्रदर्शन में शामिल किसानों ने अपने दर्द को खुलकर बताया।
गांव बरगांव के किसान रामचरन यादव ने कहा — “हमने बीज उधार में लिया, खाद महंगे दाम पर खरीदी, अब फसल बर्बाद हो गई। बैंक किस्त मांग रहा है, सरकार मदद नहीं कर रही। क्या हम अपराधी हैं जो खेती करते हैं?”
संतोष कुमार निषाद ने कहा — “मेरे खेत में दो एकड़ धान था। बारिश में सब सड़ गया। अब घर में खाने को अनाज नहीं है। बच्चों की पढ़ाई बंद करनी पड़ेगी। सरकार अगर हमारी नहीं सुनेगी, तो हम सरकार बदल देंगे।”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “किसान अब सिर्फ वोट बैंक नहीं रहा। वह जान चुका है कि उसका हक उसे खुद लड़कर लेना होगा। हम किसानों को यह विश्वास दिलाने आए हैं कि किसान कांग्रेस हर गाँव तक जाएगी और उनका दर्द मुख्यमंत्री तक पहुँचाएगी।”
प्रदर्शन में उठी मांगें — 7 सूत्री प्रस्ताव पारित
प्रदर्शन स्थल पर किसान कांग्रेस ने किसानों की मांगों को लेकर एक 7 सूत्री प्रस्ताव पारित किया, जिसमें निम्नलिखित बातें शामिल थीं:
वर्षा से प्रभावित सभी क्षेत्रों में फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण कराया जाए।
प्रत्येक प्रभावित किसान को ₹50,000 की आर्थिक सहायता दी जाए।
किसानों के कर्ज की वसूली तत्काल रोकी जाए और दीर्घकालिक कर्ज माफ किया जाए।
किसानों को खाद, बीज, डीएपी, यूरिया निशुल्क उपलब्ध कराया जाए।
डीएपी और यूरिया की कालाबाजारी पर रोक लगाने हेतु विशेष टीम बनाई जाए।
किसानों के बिजली बिल माफ किए जाएं।
राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा ग्राम-स्तरीय सत्यापन अभियान चलाया जाए ताकि वास्तविक किसानों को ही राहत मिले।
“यह आवाज खेत से उठी है, फाइलों में नहीं दबेगी”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा —
“यह आवाज खेतों से उठी है, इसे कोई फाइल में दबा नहीं सकता। किसान की आवाज आज सीतापुर से उठी है, कल यह लखनऊ तक गूंजेगी। सरकार अगर किसानों की पीड़ा नहीं समझेगी, तो यह जनाक्रोश लोकतंत्र में बदलाव का कारण बनेगा।”
उन्होंने कहा कि प्रशासन सर्वे के नाम पर खानापूरी करता है, और मुआवजा उन्हीं लोगों को दिया जाता है जो खेतों में खेती नहीं करते। असली किसान अब भी अपने खेतों में गड्ढे खोदकर पानी निकाल रहा है। यह अन्याय अब और नहीं चलेगा।
“कर्ज माफी के वादे कहाँ गए?”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल किया —
“2017 में सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था। आठ साल बीत गए, कितने किसानों का कर्ज वास्तव में माफ हुआ? कितनों की जमीनें अब भी बैंक की नीलामी सूची में हैं? यह सरकार किसानों की नहीं, पूंजीपतियों की सरकार बन चुकी है।”
उन्होंने कहा कि किसान कांग्रेस इस सरकार की झूठी नीतियों का पर्दाफाश करेगी और किसानों को जागरूक करेगी। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले दिनों में “किसान हक यात्रा” पूरे प्रदेश में निकाली जाएगी।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
प्रदर्शन में ग्रामीण क्षेत्रों से आईं महिलाएं भी शामिल रहीं।
सीमा देवी, ललिता बिंद, मीरा देवी, शांति यादव जैसी कई महिला किसानों ने कहा कि घर चलाना अब मुश्किल हो गया है। जब फसल नष्ट होती है, तो सबसे बड़ा आघात महिलाओं को झेलना पड़ता है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा, “महिलाएं खेती की रीढ़ हैं। वे खेत में भी काम करती हैं और घर भी संभालती हैं। अगर सरकार सच में किसानों की हितैषी है, तो उसे महिला किसानों को अलग राहत पैकेज देना चाहिए।”
जनता की आवाज़ — “अब की बार किसान जवाब देगा”
कई किसानों ने कहा कि अगर सरकार अब भी अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करती, तो 2027 में जनता उसका जवाब वोट से देगी।
किसान गजोधर प्रसाद ने कहा — “हमारा धैर्य अब टूट चुका है। सरकार अगर हमारी नहीं, तो हम सरकार क्यों?”
बिंदेश्वरी यादव ने कहा — “हम अधिकार लेकर रहेंगे, चाहे हमें सड़क पर उतरना पड़े या जेल जाना पड़े। राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व में हम हर कीमत पर अपनी फसल और हक की लड़ाई जीतेंगे।”
प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया
प्रदर्शन के अंत में किसान प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी सिधौली को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में फसल मुआवजा, कर्ज माफी और राहत वितरण की पारदर्शी व्यवस्था की मांग की गई।
उपजिलाधिकारी ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए कहा कि वे मामले को उच्चाधिकारियों तक भेजेंगे और शीघ्र रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
राजनीतिक नहीं, मानवीय आंदोलन
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यह आंदोलन किसी पार्टी या सत्ता के खिलाफ नहीं, बल्कि किसानों की जिंदगी बचाने के लिए है। उन्होंने कहा —
“हम न तो सत्ताधारी दल से नफरत करते हैं, न किसी को नीचा दिखाना चाहते हैं। हम बस यह चाहते हैं कि किसान को उसका अधिकार मिले, उसे सम्मान मिले। यह आंदोलन राजनीति का नहीं, मानवता का आंदोलन है।”
किसान कांग्रेस का संकल्प
प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान कांग्रेस के पदाधिकारियों ने कहा कि आने वाले हफ्तों में प्रदेश के सभी जिलों में किसान पंचायतें आयोजित की जाएंगी। “किसान की बात, किसान के साथ” अभियान चलाया जाएगा, जिसमें हर गांव से प्रतिनिधि चुना जाएगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा —
“यह आंदोलन लम्बा चलेगा। जब तक हर किसान को मुआवजा नहीं मिलता, तब तक हम शांत नहीं बैठेंगे। किसान कांग्रेस अब सिर्फ विपक्ष नहीं, बल्कि किसानों की आवाज़ बन चुकी है।”
किसानों का जोश, सरकार की चुप्पी
प्रदर्शन में शामिल युवा किसान ज्ञानेंद्र कुमार गौतम ने कहा —
“हम अब वोट मांगने वालों से सवाल पूछेंगे। अगर वे हमारे खेत नहीं देख सकते, तो उन्हें हमारे गांवों में वोट मांगने का अधिकार नहीं।”
किसानों ने कहा कि सरकार का रवैया असंवेदनशील है। राहत की घोषणाएं केवल प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित हैं। खेतों में कोई अधिकारी नहीं जाता, और किसान भूख से जूझ रहा है।
“किसान का दर्द अब छिपेगा नहीं”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा —
“आज मीडिया के साथी भी इस आंदोलन का हिस्सा हैं। क्योंकि किसान का दर्द अब छिपेगा नहीं। किसान की आवाज अब खेत से निकलकर देश की राजधानी तक जाएगी।”
उन्होंने कहा कि किसान कांग्रेस हर जिले में “किसान अधिकार मंच” बनाएगी, जहाँ किसानों को अपनी समस्या सीधे दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।
निष्कर्ष: किसान की पुकार, सरकार की परीक्षा
प्रेस नोट के अंत में किसान कांग्रेस ने कहा कि यह आंदोलन किसी विरोध की राजनीति नहीं, बल्कि एक पुकार है — उस किसान की, जो इस देश को अन्न देता है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा —
“यह सिर्फ आंदोलन नहीं, किसान की पुकार है। अगर यह पुकार अब भी अनसुनी की गई, तो आने वाले वर्षों में यह गूंज लखनऊ की सत्ता तक सुनाई देगी। सरकार की असली परीक्षा अब है — क्या वह अपने अन्नदाता के साथ खड़ी होगी या आंकड़ों के पीछे छिपेगी?”
भवदीय,
राजेश कुमार सिद्धार्थ
प्रदेश उपाध्यक्ष, किसान कांग्रेस
संपर्क कार्यालय: अब तक टीवी मीडिया हाउस,
सेमरा गौढी (खदरी), सीतापुर रोड, लखनऊ – 226013
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