किसानों की बर्बादी पर सरकार की खामोशी चिंताजनक,
“वर्षा से धान की फसल पूरी तरह चौपट — किसानों को तुरंत मुआवजा मिले”:
प्रदेश उपाध्यक्ष किसान कांग्रेस राजेश कुमार सिद्धार्थ
लखनऊ/सीतापुर, 2 नवम्बर 2025।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद के सिधौली तहसील क्षेत्र सहित कई जनपदों में हुई लगातार वर्षा ने किसानों की कमर तोड़ दी है। 26 से 29 अक्टूबर तक हुई भारी वर्षा ने धान की खड़ी फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। खेतों में पानी भर गया, धान की बालियाँ सड़ गईं, कटाई के लिए तैयार फसलें कीचड़ में धँस गईं। यह प्राकृतिक आपदा किसानों के लिए ऐसी मार बनकर आई है, जिससे उबरना उनके लिए बेहद कठिन है।
प्रदेश उपाध्यक्ष किसान कांग्रेस राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “सरकार को चाहिए कि वह किसानों के प्रति अपनी नैतिक और आर्थिक जिम्मेदारी दोनों निभाए। फसल बर्बादी की भरपाई केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि किसानों के बैंक खातों में होनी चाहिए। किसान की बदहाली को राजनीति से जोड़ना इस सरकार का सबसे बड़ा अपराध है।”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि उन्होंने सैकड़ों किसानों के साथ मिलकर उप जिलाधिकारी सिधौली के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें यह मांग की गई है कि प्रत्येक प्रभावित किसान को न्यूनतम ₹50,000 का मुआवजा, बैंकों और समितियों से लिए गए कर्ज की वसूली पर तत्काल रोक, तथा कर्ज माफी की घोषणा की जाए।
धान की फसल तबाह, खेतों में पसरा सन्नाटा
जनपद सीतापुर के गांवों — मिरगांव, गनेशपुर, महोली, रामनगर, सेमरा, कटरा, बरगांव, सरायबेगम, चांदपुर, हजारीपुर, चपरा, फत्तेपुर और आसपास के तमाम इलाकों में किसानों की हालत बेहद खराब है। खेतों में पानी भरा है, मशीनें धंस चुकी हैं, और जो किसान धान की कटाई में जुटे थे, वे अब पूरी तरह हताश हैं।
कई किसानों ने बताया कि वे इस बार धान की खेती के लिए उधार लेकर बीज, खाद और डीजल तक का इंतजाम किए थे। बारिश ने उनके सपनों को ही डुबो दिया। अब वे सोच रहे हैं कि आने वाले महीनों में परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे।
गांव के किसान रामेश्वर यादव, हरिश्चंद्र वर्मा, राजकुमार निषाद, भोलानाथ पासी, सीमा देवी आदि का कहना है कि “हमारी फसल पूरी बर्बाद हो चुकी है। खेतों में पानी है, कटाई असंभव है। शासन-प्रशासन अब तक कोई राहत देने नहीं आया। अगर सरकार मदद नहीं करती तो हमें कर्ज और भुखमरी के बीच आत्महत्या तक करनी पड़ेगी।”
“किसान को सिर्फ वोट समझना बंद करे सरकार”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि किसान केवल वोट नहीं, बल्कि इस देश की रीढ़ है। जब किसान टूटता है तो देश की अर्थव्यवस्था कमजोर होती है। लेकिन दुर्भाग्य है कि हर बार जब प्राकृतिक आपदा आती है, सरकार सिर्फ आंकड़ों का खेल खेलती है।
उन्होंने कहा, “सर्वे के नाम पर अधिकारी कागज़ी खानापूरी करते हैं, और अंत में मुआवजा उन्हीं को मिलता है जिनके खेतों में फसल ही नहीं थी। असली पीड़ित किसान को कुछ नहीं मिलता। यह अन्याय अब और नहीं चलेगा। किसान कांग्रेस हर गांव तक जाएगी और हर किसान की आवाज़ मुख्यमंत्री तक पहुंचाएगी।”
ज्ञापन में रखी गई मुख्य माँगें
वर्षा से प्रभावित सभी ग्राम पंचायतों में फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण किया जाए।
प्रत्येक प्रभावित किसान को ₹50,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
किसानों के ऊपर चल रही कर्ज वसूली की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए।
वर्ष 2025 में हुए नुकसान के आधार पर कर्ज माफी की योजना लागू की जाए।
रबी सीजन के लिए किसानों को खाद, बीज, डीएपी और यूरिया निःशुल्क दी जाए।
डीएपी और यूरिया की कालाबाजारी पर तत्काल नियंत्रण के लिए विशेष जांच दल बने।
किसानों के बिजली बिल माफ किए जाएं।
जिला प्रशासन द्वारा ब्लॉक और तहसील स्तर पर किसान सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं।
हर ग्राम पंचायत में राजस्व विभाग के अधिकारी द्वारा सत्यापन अभियान चलाया जाए।
राहत राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से जमा की जाए।
“किसानों की पीड़ा को सरकार समझे”
किसान कांग्रेस ने स्पष्ट कहा है कि यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि किसानों के साथ खड़े होने का है। हर साल प्राकृतिक आपदा के बाद किसान तबाही झेलता है, पर राहत घोषणाएँ केवल मीडिया हेडलाइन तक सीमित रहती हैं। इस बार किसान कांग्रेस यह सुनिश्चित करेगी कि एक भी किसान मुआवजे से वंचित न रहे।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा, “हमारा संगठन किसानों के साथ हर कदम पर खड़ा रहेगा। अगर सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो किसान कांग्रेस के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर ‘जन आंदोलन’ छेड़ेंगे। यह लड़ाई किसानों की आत्मसम्मान की लड़ाई होगी।”
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर
धान की फसल चौपट होने से सिर्फ किसान नहीं, बल्कि उससे जुड़ी पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। खेतिहर मजदूरों के पास काम नहीं है, मंडियों में आवक बंद है, आढ़तियों और व्यापारियों का धंधा ठप है। सीतापुर, हरदोई, बहराइच, लखीमपुर, बाराबंकी और गोंडा जनपदों में ग्रामीण बाजार सूने पड़ गए हैं।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति रही, तो आगामी रबी फसल में किसान निवेश नहीं कर पाएंगे। इससे खाद्यान्न संकट उत्पन्न हो सकता है। किसान कांग्रेस का मानना है कि यह केवल किसानों की नहीं, बल्कि पूरे राज्य की आर्थिक चुनौती है, जिसे गंभीरता से लेना आवश्यक है।
कर्ज माफी और राहत नीति पर सवाल
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने सरकार से यह भी पूछा कि वर्ष 2017 में किए गए कर्ज माफी के वादे का क्या हुआ? कितने किसानों को वास्तव में लाभ मिला? उन्होंने कहा कि किसानों को लुभाने के लिए किए गए वादे अब केवल चुनावी नारों में बदल चुके हैं।
उन्होंने कहा कि “किसान कर्ज में डूबा है, फसल बर्बाद है, बैंक नोटिस भेज रहे हैं, साहूकार दबाव बना रहे हैं। ऐसे में अगर सरकार संवेदनशील नहीं हुई तो प्रदेश भर में किसान आत्महत्या की घटनाएँ बढ़ सकती हैं। किसान की जान बचाना अब सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।”
“प्रशासनिक लापरवाही भी बड़ी वजह”
कई किसानों ने यह भी बताया कि नालियों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था सही न होने से उनके खेतों में कई दिनों तक पानी जमा रहा। इससे फसल सड़ गई। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पहले से तैयार रहना चाहिए था। यह आपदा सिर्फ प्राकृतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम भी है।
किसान कांग्रेस का संकल्प
प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “किसान कांग्रेस हर जिले में जाकर किसानों की वास्तविक स्थिति का सर्वे करेगी और उसकी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी किसान अपने अधिकार से वंचित न रहे।”
उन्होंने बताया कि आने वाले सप्ताह में किसान जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें ब्लॉक स्तर पर किसान पंचायतें आयोजित होंगी। इन पंचायतों में किसानों को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
किसान सिर्फ एक वर्ग नहीं, जीवन का आधार है
प्रेस नोट में कहा गया है कि किसान सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। अगर किसान खुशहाल होगा तो देश मजबूत होगा। लेकिन जब किसान दुखी होता है, तो समाज का संतुलन टूटता है। इसलिए किसान कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि हर नीति के केंद्र में किसान होना चाहिए, न कि उद्योगपति।
समापन अपील
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “हम मुख्यमंत्री महोदय से निवेदन करते हैं कि वे स्वयं इस विषय पर हस्तक्षेप करें और प्रभावित जिलों के किसानों को तुरंत राहत दिलाएं। मुआवजे की राशि जल्द जारी कराई जाए, ताकि किसान अगली फसल की तैयारी कर सके। यह केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का प्रश्न है।”
भवदीय,
राजेश कुमार सिद्धार्थ
प्रदेश उपाध्यक्ष, किसान कांग्रेस
संपर्क कार्यालय: अब तक टीवी मीडिया हाउस,
सेमरा गौढी (खदरी), सीतापुर रोड, लखनऊ – 226013
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