“भाजपा सरकार केवल भाषण देती है, काम नहीं करती” — राजेश कुमार सिद्धार्थ
सिधौली में किसान सभा, धान की फसल बर्बाद — किसानों ने कहा, राहत और मुआवजा के बिना गांवों में बढ़ रहा संकट
सिधौली (जनपद सीतापुर)।
सिधौली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आयोजित एक बड़ी किसान सभा में किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “भाजपा सरकार केवल भाषण देती है, काम नहीं करती। जब बड़े उद्योगपतियों को हजारों करोड़ की छूट दी जा सकती है, तो किसानों के लिए कुछ लाख रुपये क्यों नहीं?”
सभा में उपस्थित सैकड़ों किसानों ने तालियों की गड़गड़ाहट से इस वक्तव्य का समर्थन किया। राजेश कुमार सिद्धार्थ ने आगे कहा कि “यह सरकार किसानों को केवल वोट बैंक समझती है, लेकिन उनके जीवन की चिंता नहीं करती। किसान की मेहनत पर टिकी अर्थव्यवस्था को इस सरकार ने राजनीतिक हथियार बना दिया है।”
धान की फसल बर्बादी और ग्रामीण संकट
सिधौली ब्लॉक के गांव — बरौली, जमालपुर, पिपरी खुर्द, बघौना, मल्हेपुर, गंगापुर और रघुनाथपुर — में इस वर्ष हुई भारी वर्षा से किसानों की धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। खेतों में जलभराव और कीट संक्रमण से उत्पादन लगभग शून्य हो गया है। किसानों ने बताया कि एक बीघे पर औसतन ₹15,000 से ₹20,000 खर्च हुआ, लेकिन अब उनकी पूरी मेहनत मिट्टी में मिल गई है।
ग्राम मल्हेपुर के किसान रामलाल गौतम ने बताया कि “खेत में धान काटने लायक नहीं बचा, सारा पानी में सड़ गया। खाद और बीज के लिए कर्ज लिया था, अब बैंक और साहूकार दोनों पैसे मांग रहे हैं।”
इसी तरह सरोजिनी देवी नामक महिला किसान ने कहा कि “हमने मेहनत से खेत में बोआई की, पर अब खाने तक का धान नहीं बचा।”
इन हालातों को देखते हुए राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “सरकार का मौन रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। किसानों की फसल बर्बादी केवल उत्पादन का नुकसान नहीं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूटने जैसा है।”
सरकार पर गंभीर आरोप
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि भाजपा सरकार ने 2017 से लेकर अब तक किसानों से बड़े-बड़े वादे किए — किसानों की आय दोगुनी करने, हर खेत को पानी देने, और न्यूनतम समर्थन मूल्य को सुनिश्चित करने की बातें कीं, पर ज़मीन पर कुछ नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि “सरकार केवल विज्ञापन और प्रचार में व्यस्त है। करोड़ों रुपये ‘डबल इंजन सरकार’ के प्रचार पर खर्च होते हैं, लेकिन खेतों में बीज और खाद की सब्सिडी तक समय से नहीं मिलती। जब उद्योगपतियों को राहत देने की बात आती है तो सरकार झुक जाती है, और जब किसानों की बात आती है तो फाइलें अटक जाती हैं।”
राजेश सिद्धार्थ ने कहा कि “भाजपा सरकार किसान के कंधे पर राजनीति का बोझ डाल रही है। किसान को वोट बैंक बना लिया गया है, पर उसे उसका हक नहीं दिया जा रहा।”
किसान कांग्रेस की मांगें
सभा में किसान कांग्रेस की ओर से प्रदेश सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगे रखी गईं —
फसल नुकसान का सर्वे: प्रभावित गांवों में तत्काल राजस्व व कृषि विभाग की संयुक्त टीम भेजी जाए।
मुआवजा भुगतान: प्रति बीघा कम से कम ₹15,000 मुआवजा दिया जाए।
बीमा योजना में पारदर्शिता: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमा कंपनियों पर नियंत्रण लगाया जाए।
ऋण राहत योजना: किसानों के ऋण माफ किए जाएं या ब्याज मुक्त पुनर्निर्धारित किए जाएं।
समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी: न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी अधिकार के रूप में सुनिश्चित किया जाए।
“सरकार किसानों की आंखों में धूल झोंक रही है”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “किसान सम्मान निधि केवल छलावा है। ₹6,000 सालाना से कोई किसान जीवित नहीं रह सकता। यह सरकार किसानों को भीख देती है, सम्मान नहीं।” उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में किसानों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है — महंगाई बढ़ी, बिजली महंगी हुई, डीजल और खाद के दाम दोगुने हुए, लेकिन फसल का दाम जस का तस है।
उन्होंने यह भी कहा कि “सरकार किसानों की आंखों में धूल झोंक रही है। टीवी पर बड़ी-बड़ी घोषणाएँ होती हैं, लेकिन धरातल पर किसान अपनी फसल और भविष्य दोनों खो रहा है।”
कांग्रेस का रुख — किसानों के साथ
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसानों, मजदूरों और युवाओं के हितों की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। उन्होंने घोषणा की कि “कांग्रेस पार्टी आने वाले चुनावों में किसानों की आवाज को केंद्र में रखकर कृषि घोषणा पत्र तैयार करेगी। इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, बीमा पारदर्शिता, और ग्रामीण बैंकिंग सुधार की बातें शामिल होंगी।”
उन्होंने कहा कि “हमारा लक्ष्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है, न कि उन्हें सरकारी राहतों पर निर्भर रखना। कांग्रेस की सरकार आने पर किसान के खेत से लेकर मंडी तक, हर स्तर पर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।”
2027 चुनाव की चेतावनी
सभा के दौरान जब किसानों ने “किसान विरोधी सरकार हाय-हाय” के नारे लगाए, तो राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा —
“यदि भाजपा सरकार किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाती, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में किसान मुंहतोड़ जवाब देंगे। अब किसान ठगा नहीं जाएगा। जिसने हमारी फसल बर्बादी पर आंख मूंद ली, उसे हम सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएंगे।”
उन्होंने कहा कि “भाजपा सरकार को यह समझना चाहिए कि किसान वोट देने वाला वर्ग नहीं, बल्कि देश को जिंदा रखने वाला वर्ग है। उसकी उपेक्षा करने वाली हर सरकार को जनता उखाड़ फेंकेगी।”
फसल बीमा और प्रशासनिक लापरवाही
सभा में कई किसानों ने बीमा कंपनियों की मनमानी का मुद्दा उठाया। ग्राम बघौना के किसान शिवप्रसाद ने कहा कि “हमने बीमा प्रीमियम दिया, लेकिन नुकसान होने पर कोई अधिकारी सर्वे करने नहीं आया।”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि योजनाबद्ध शोषण है। उन्होंने मांग की कि बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी तय की जाए और किसानों को उनके खाते में सीधा भुगतान मिले।
उन्होंने कहा कि “सरकार को किसानों का हित देखना चाहिए, न कि बीमा कंपनियों का मुनाफा।”
आर्थिक विश्लेषण और सामाजिक प्रभाव
सभा में अर्थशास्त्रियों और स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि फसल बर्बादी से केवल उत्पादन का नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि ग्रामीण बाजार भी ठप पड़ गया है। दुकानदारों की बिक्री घटी है, मजदूरों को काम नहीं मिल रहा, और गांवों में पलायन की स्थिति बन रही है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “किसान की कमर टूटना मतलब गांव की रफ्तार रुकना है। जब गांव कमजोर होगा, तब शहर भी टिक नहीं पाएगा। भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि किसान की हालत सुधारना देश की रीढ़ को बचाना है।”
ज्ञापन सौंपा गया
सभा के उपरांत किसान प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी सिधौली को ज्ञापन सौंपा, जिसमें यह मांग की गई कि —
प्रभावित गांवों में तुरंत सर्वे प्रारंभ किया जाए,
मुआवजा वितरण की प्रक्रिया 15 दिनों में पूरी की जाए,
बीमा दावों का भुगतान किसानों के खातों में सीधा किया जाए,
प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो किसान कांग्रेस धरना-प्रदर्शन करेगी और जरूरत पड़ी तो विधानसभा घेराव भी किया जाएगा।”
भविष्य की योजना
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने घोषणा की कि किसान न्याय यात्रा दिसंबर से शुरू की जाएगी, जिसमें प्रदेशभर के जिलों का भ्रमण कर किसानों की समस्याओं को जनता और मीडिया के सामने लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि “यह आंदोलन किसानों की इज़्जत और अधिकार की लड़ाई है, इसे कोई रोक नहीं सकता।”
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार बनने पर किसानों के लिए एक ‘राष्ट्रीय कृषि राहत कोष’ बनाया जाएगा, जिससे प्राकृतिक आपदा की स्थिति में तत्काल सहायता मिल सके।
किसानों की एकता का संदेश
सभा के अंत में उन्होंने किसानों से कहा —
“सरकारें तभी झुकती हैं जब जनता एकजुट होती है। किसान अगर संगठित हो जाए, तो कोई भी सरकार उसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती।”
सभा के समापन पर “जय जवान, जय किसान” और “किसान एकता ज़िंदाबाद” के नारे लगाए गए। किसानों ने संकल्प लिया कि वे आने वाले चुनाव में किसान विरोधी नीतियों को सबक सिखाएँगे।
