किसानों को सरकार दे फसल का मुआवजा, वरना 2027 में किसान देंगे जवाब” — राजेश कुमार सिद्धार्थ
सिधौली में विशाल किसान सभा, वर्षा से बर्बाद फसल पर जताई चिंता, कहा – भाजपा सरकार ने किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया
सिधौली (जनपद सीतापुर)।
सिधौली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आयोजित एक विशाल किसान सभा में किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “भारी वर्षा और प्राकृतिक आपदा से किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं, लेकिन सरकार अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। भाजपा सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, परंतु आज किसान कर्ज, निराशा और भूख से जूझ रहे हैं।”
सभा में उपस्थित हजारों किसानों ने अपने खेतों में हुए नुकसान का ब्यौरा सुनाया और सरकार से तत्काल मुआवजा वितरण की मांग की। इस दौरान राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “सरकार की उदासीनता से किसानों का विश्वास टूट रहा है। यह केवल फसल का नुकसान नहीं, बल्कि किसान के आत्मसम्मान का अपमान है।”
धान की फसल तबाह, किसान हुए निराश
सिधौली ब्लॉक और आसपास के गांवों – बरौली, बघौना, पिपरी खुर्द, जमालपुर, मल्हेपुर, गंगापुर और रघुनाथपुर – में अक्टूबर महीने की निरंतर वर्षा के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल सड़ गई। खेतों में पानी भरा रहने से कटाई असंभव हो गई। किसानों ने बताया कि उन्होंने एक बीघा खेत में औसतन 15 से 20 हजार रुपये का खर्च किया था, लेकिन अब उनकी मेहनत पूरी तरह मिट्टी में मिल गई।
किसान रामसजीवन यादव ने कहा, “हमने खेत में बीज, खाद, डीजल सब उधार पर लिया था। अब फसल बर्बाद हो गई है तो कर्ज कैसे चुकाएँ?”
इसी प्रकार सरोजिनी देवी नामक महिला किसान ने कहा कि “हमने उम्मीद की थी कि धान की बिक्री से घर चलेगा, लेकिन अब खाने तक का संकट है।”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने किसानों की व्यथा सुनने के बाद कहा कि यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की भी देन है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले से पता था कि वर्षा का असर गंभीर होगा, फिर भी न तो कोई बचाव योजना बनी और न ही कोई आपात राहत दल गठित हुआ।
सरकार पर तीखा प्रहार
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा, “भाजपा सरकार केवल भाषण देती है, काम नहीं करती। जब बड़े उद्योगपतियों को हजारों करोड़ की छूट दी जा सकती है, तो किसानों के लिए कुछ लाख रुपये क्यों नहीं?” उन्होंने आगे कहा कि यह सरकार किसान को वोट बैंक समझती है, लेकिन उसके जीवन की चिंता नहीं करती।
उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने कई बार किसानों की आय दोगुनी करने की बात की थी, पर आज हालत यह है कि किसान की आय आधी रह गई है, जबकि लागत दोगुनी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि “किसान को न समय पर बीज मिलता है, न खाद। समर्थन मूल्य केवल कागजों में है, खरीद केंद्र समय से नहीं खुलते, और फसल बिकने से पहले ही बिचौलिए लूट लेते हैं।”
किसान कांग्रेस की मांगें
सभा में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने सरकार के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखीं –
फसल नुकसान का तत्काल सर्वे: प्रत्येक ग्राम पंचायत में राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम बनाकर सर्वे कराया जाए।
मुआवजा भुगतान: जिन किसानों की फसल नष्ट हुई है, उन्हें प्रति बीघा कम से कम ₹15,000 की राहत राशि दी जाए।
बीमा योजना में पारदर्शिता: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अनियमितताओं की जांच कराई जाए और किसानों के खाते में सीधा भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
ऋण मोचन: जिन किसानों के ऊपर कर्ज का बोझ है, उनके लिए विशेष राहत पैकेज जारी किया जाए।
न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी: ताकि किसान को फसल का उचित दाम मिलने की संवैधानिक सुरक्षा मिल सके।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने 30 दिनों के भीतर इन मांगों पर कार्रवाई नहीं की, तो किसान कांग्रेस प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।
किसानों की पीड़ा और ग्रामीण हालात
सभा में कई किसानों ने बताया कि फसल बर्बादी के कारण मजदूरी के अवसर भी समाप्त हो गए हैं। जो लोग दैनिक मजदूरी पर निर्भर थे, उन्हें अब काम नहीं मिल रहा। छोटे दुकानदार और पशुपालक भी प्रभावित हैं।
ग्राम मल्हेपुर के कृष्णपाल गौतम ने कहा कि “हमने खेती में सारा पूंजी लगा दी, अब बैंक वाले किस्त मांग रहे हैं। अगर सरकार मदद नहीं करेगी तो आत्महत्या के सिवा कोई रास्ता नहीं बचेगा।”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने इस पर कहा कि सरकार को किसानों की आत्महत्या का इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि “किसानों की जिंदगी बचाना सिर्फ आर्थिक नहीं, नैतिक जिम्मेदारी भी है।”
राजनीतिक चेतावनी
सभा के दौरान जब किसानों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए, तब राजेश कुमार सिद्धार्थ ने मंच से कहा:
“यदि भाजपा सरकार किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाती, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में किसान मुंहतोड़ जवाब देंगे। अब किसान ठगा नहीं जाएगा। जिसने हमारी फसल बर्बादी पर आंख मूंद ली, उसे हम सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेस पार्टी आगामी चुनाव में किसानों, मजदूरों और युवाओं के मुद्दों को लेकर चुनावी एजेंडा बनाएगी। किसानों की नीतियों को लेकर एक ‘कृषि घोषणा पत्र’ तैयार किया जा रहा है, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने, बीमा योजना में पारदर्शिता लाने, और ग्रामीण क्रेडिट प्रणाली को सरल बनाने की बात शामिल होगी।”
सभा में यह घोषणा होते ही उपस्थित किसानों ने तालियों की गड़गड़ाहट से समर्थन जताया।
सरकार की नीतियों पर सवाल
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि भाजपा सरकार ने “किसान सम्मान निधि” के नाम पर किसानों को केवल झुनझुना थमा दिया है। छह हजार रुपये सालाना से कोई परिवार नहीं चल सकता। उन्होंने कहा कि “यह सरकार किसानों को भीख नहीं, उनका हक दे। किसान सम्मान निधि नहीं, किसान अधिकार निधि चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार सरकार ने ‘एक राष्ट्र, एक बाजार’ के नाम पर तीन कृषि कानून लाए थे, उसी प्रकार अब “नए योजनाओं” के बहाने कृषि को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार आने पर ऐसे किसी भी कदम का पुरजोर विरोध किया जाएगा जो किसानों को कमजोर करे।
कांग्रेस की रणनीति
किसान कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व ने घोषणा की कि आने वाले महीनों में “किसान न्याय यात्रा” प्रदेश के सभी 75 जिलों में निकाली जाएगी। इस यात्रा का उद्देश्य किसानों को संगठित कर सरकार की असफलताओं को उजागर करना होगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “कांग्रेस किसी एक वर्ग की नहीं, किसान और मजदूर की पार्टी है। हमें एकजुट होकर आने वाले चुनाव में किसानों का सम्मान बहाल करना है।”
उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य है कि हर किसान की फसल का सही दाम, सही समय पर मिले, और कोई किसान कर्ज या आपदा के कारण आत्महत्या न करे।
ज्ञापन सौंपा गया
सभा समाप्त होने के बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी सिधौली को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यह मांग की गई कि –
प्रभावित गांवों में 48 घंटे के भीतर सर्वे प्रारंभ किया जाए।
जिन किसानों के खेतों में पानी भर गया है, उन्हें तत्काल अस्थायी राहत दी जाए।
बीमा कंपनियों द्वारा भुगतान में देरी पर कार्यवाही की जाए।
कृषि विभाग किसानों से संवाद स्थापित करे और राहत वितरण पारदर्शी बनाए।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यदि इन मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तो किसान कांग्रेस चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगी, जिसमें धरना, रैली और विधानसभा घेराव शामिल होंगे।
ग्रामीण विकास और किसानों की भूमिका
सभा में वक्ताओं ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माता है। गांवों की समृद्धि ही भारत की समृद्धि है। लेकिन आज ग्रामीण क्षेत्र उपेक्षा का शिकार हैं। स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, सिंचाई नहरें, सड़कों – सभी में सुधार की आवश्यकता है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “अगर किसान खुशहाल होगा तो गांवों में रोजगार बढ़ेगा, पलायन रुकेगा और देश मजबूत बनेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार आने पर ग्रामीण कृषि विकास योजना के तहत गांवों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
किसानों की एकता ही ताकत
सभा के अंत में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने किसानों से एकता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “सरकारें तब झुकती हैं जब जनता एकजुट होती है। अगर सभी किसान मिलकर आवाज उठाएँगे, तो कोई भी सरकार उनकी अनदेखी नहीं कर सकेगी।”
सभा के समापन पर सभी किसानों ने संकल्प लिया कि वे आगामी दिनों में अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे और आने वाले चुनाव में किसान विरोधी सरकार को उखाड़ फेंकेंगे।
सभा के अंत में राष्ट्रीय ध्वज के समक्ष “जय जवान, जय किसान” और “किसान एकता ज़िंदाबाद” के नारे लगाए गए।
