लेखपालों का तहसील समाधान दिवस पर धरना-प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को सौंपा 30 पृष्ठीय ज्ञापन
अमोद कुमार | बाँदा
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर बाँदा जनपद में आज तहसील समाधान दिवस एक अलग ही रंग में दिखाई दिया। सामान्यतः शिकायत सुनवाई के लिए आयोजित होने वाला यह दिवस इस बार लेखपाल संवर्ग के वर्षों से लंबित मुद्दों और शासन की उदासीनता के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन का मंच बन गया। बाँदा तहसील परिसर में सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक लेखपालों ने शांतिपूर्ण किन्तु प्रभावी ढंग से धरना-प्रदर्शन किया, जिसमें जिले भर से आए लेखपालों की उपस्थिति ने आंदोलन को महत्वपूर्ण आयाम दिया।
यह प्रदर्शन केवल बाँदा का नहीं था; बल्कि पूरे प्रदेश में एक साथ आयोजित किए गए इस आंदोलन के तहत लेखपाल संवर्ग ने सरकार तक अपनी आवाज पहुँचाने का संगठित प्रयास किया। लेखपाल संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि मांगों पर तुरंत और सकारात्मक कार्यवाही नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक और तीव्र किया जाएगा।
धरने की भूमिका और पृष्ठभूमि
तहसील समाधान दिवस आमतौर पर नागरिक समस्याओं के समाधान का मंच होता है, मगर अब कई महीनों से लेखपाल संवर्ग अपनी सेवा-शर्तों, पदोन्नति और वेतनमान से जुड़ी समस्याओं को लेकर लगातार असंतोष व्यक्त कर रहा है।
लेखपालों का कहना है कि राज्य में राजस्व व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इस संवर्ग की दशा वर्षों से उपेक्षित रही है। राजस्व वसूली, वरासत, भूमि विवाद निस्तारण, सीमांकन, सरकारी योजनाओं के सत्यापन से लेकर चुनावी कार्यों तक—लगभग हर महत्वपूर्ण सरकारी कार्य की प्रथम कड़ी लेखपाल ही होता है।
इसके बावजूद उनकी वेतन विसंगतियाँ, पदोन्नति की जटिल प्रक्रिया, भत्तों में स्थिरता, कार्यभार के अनुपात में संसाधनों की कमी, और एसीपी की अनियमितता जैसे मुद्दे अब तक अनसुलझे हैं।
धरना शुरुआत — संगठनात्मक शक्ति का प्रदर्शन
आज सुबह जैसे ही तहसील परिसर में लेखपालों का जमावड़ा शुरू हुआ, वातावरण बदलने लगा। नीले और सफेद रंग की वर्दी में सजे लेखपाल, हाथों में मांगपत्र लिए, और संघ के बैनर तले लामबंद दिखे।
धरने की अध्यक्षता तहसील अध्यक्ष दीपक त्रिपाठी ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा:
“लेखपाल का दायित्व आज 20 वर्ष पहले की तुलना में कई गुना बढ़ चुका है। लेकिन सुविधाएँ, पदोन्नति और वेतनमान उसी अनुपात में नहीं बढ़े। शासन ने कई बार आश्वासन दिया, लेकिन ठोस कार्यवाही अब तक नहीं हुई। इसलिए यह आंदोलन केवल अधिकारों की लड़ाई नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था के सुधार की लड़ाई भी है।”
इसके बाद जिला अध्यक्ष किश बुंदेला, जिला मंत्री रविंद्र यादव, जिला कोषाध्यक्ष गोविंद शुक्ला, तहसील मंत्री, ब्लॉक प्रतिनिधि और कई वरिष्ठ लेखपालों ने भी अपने विचार रखे।
लेखपालों की मुख्य माँगें — 30 पन्नों के ज्ञापन में दर्ज
धरना समाप्त होने के बाद लेखपालों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित 30 पृष्ठीय विस्तृत ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से सौंपा।
इस ज्ञापन में निम्न मुख्य बिंदु प्रमुख रूप से शामिल हैं:
1. वेतन उच्चीकरण
लेखपालों के मूल वेतनमान को समय के अनुसार संशोधित करने की मांग।
अन्य विभागों की तुलना में लेखपाल का वेतन कम होने पर आपत्ति।
जोखिम भत्ता और क्षेत्रीय भत्तों की मांग, क्योंकि लेखपाल फील्ड में कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हैं।
2. पदोन्नति व्यवस्था में सुधार
नायब तहसीलदार पद पर पदोन्नति की स्पष्ट और तेज प्रक्रिया लागू करने की मांग।
रिक्त पदों को शीघ्रता से भरने का अनुरोध।
सेवा-काल आधारित पदोन्नति नीति लागू करने का प्रस्ताव।
3. एसीपी (Assured Career Progression) विसंगतियाँ दूर करने की मांग
तृतीय और चतुर्थ एसीपी लंबित होने की शिकायत।
एसीपी का लाभ अन्य विभागों की तरह नियमित और समान रूप से देने की आवश्यकता।
4. भत्तों में वृद्धि
वाहन भत्ता, फील्ड भत्ता और मोबाइल भत्ता जैसे कई मदों में वृद्धि की मांग।
फील्ड कार्यों के बढ़ते दबाव को देखते हुए विशेष भत्ता प्रदान करने का अनुरोध।
5. अंतर-मंडलीय स्थानांतरण नीति लागू करना
लेखपालों के लिए पारदर्शी और सरल ट्रांसफर पॉलिसी की आवश्यकता।
पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से स्थानांतरण की अनुमति देने की मांग।
6. संसाधन और तकनीकी सुविधाएँ उपलब्ध कराना
फील्ड सर्वे, डिजिटल मैपिंग, ऑनलाइन सत्यापन जैसे बढ़ते कार्यों के अनुरूप तकनीकी सपोर्ट की व्यवस्था।
लैपटॉप, टैबलेट और इंटरनेट सुविधाओं का प्रावधान।
7. कार्यभार के संतुलन की माँग
एक लेखपाल के जिम्मे औसत 6–10 गांव दिए जाते हैं, जिसे कम कर यथार्थवादी स्तर पर लाने की आवश्यकता।
लगातार बढ़ते सरकारी कार्य—जैसे प्रधानमंत्री आवास, राशन कार्ड सत्यापन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, भूमि विवाद निस्तारण—इन सब के अनुपात में स्टाफ बढ़ाने की मांग।
संघ का आरोप: सरकार ने बार-बार आश्वासन दिया, लेकिन समाधान नहीं
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि पिछले कई वर्षों में शासन-प्रशासन ने फ़ाइलों में प्रस्ताव आगे बढ़ाए, बैठकें कीं, अधिकारियों ने उम्मीद जगाई, लेकिन कोई ठोस आदेश जारी नहीं हुआ।
इससे लेखपाल संवर्ग में लगातार असंतोष बढ़ रहा है।
संघ के जिला अध्यक्ष किश बुंदेला ने कहा:
“हमारी मांगें नई नहीं हैं। वर्षों से लंबित हैं। राजस्व कार्यों की रीढ़ होने के बावजूद लेखपालों की समस्याएं लगातार नजरअंदाज की जा रही हैं। सरकार से निवेदन है कि वह संवर्ग की भूमिका और जिम्मेदारियों को समझे और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए।”
धरने की खास बातें
तहसील परिसर में अगली कतार में वरिष्ठ लेखपालों की बड़ी उपस्थिति दिखी।
लेखपालों ने बैनर और मांगपत्र लेकर शासन से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की।
किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या बाधा उत्पन्न न हो, इसका संगठन ने विशेष ध्यान रखा।
प्रशासन ने भी इस धरने को शांतिपूर्ण तरीके से संचालित होने दिया और अंत में ज्ञापन स्वीकार किया।
अगली रणनीति — आंदोलन विस्तारित होगा
आज दिए गए ज्ञापन के साथ लेखपाल संघ ने साफ कर दिया कि यह आंदोलन केवल एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं है।
प्रांतीय कार्यकारिणी की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया कि:
यदि सरकार ने समयबद्ध तरीके से मांगे नहीं सुनीं,
यदि वेतनमान, पदोन्नति और एसीपी पर निर्णय नहीं हुआ,
यदि भत्तों में सुधार नहीं किया गया,
तो आंदोलन को आगे जिला से लेकर मंडल स्तर तक बढ़ाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार भी किया जा सकता है।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि आंदोलन का अगला चरण जल्द ही घोषित किया जाएगा।
लेखपाल संवर्ग की वास्तविक स्थिति — एक विश्लेषण
राजस्व प्रशासन में लेखपाल वह कड़ी है जो शासन और सामान्य जनता के बीच प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा रहता है।
उदाहरण के तौर पर—
किसान की जमीन की नकल चाहिए — लेखपाल।
नए घर का टैक्स निर्धारण — लेखपाल।
सीमांकन का विवाद — लेखपाल।
सरकारी योजनाओं के पात्रता सत्यापन — लेखपाल।
बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि जैसी आपदाओं में क्षति रिपोर्ट — लेखपाल।
चुनावी कार्य — लेखपाल।
इन सब जिम्मेदारियों के बावजूद लेखपालों का वेतन और सुविधाएँ अन्य तकनीकी और प्रशासनिक संवर्गों की तुलना में कम हैं।
डिजिटल कार्यों का दबाव, लगातार बढ़ते फील्ड टास्क, ऑनलाइन पोर्टल की त्रुटियाँ, सत्यापन के लिए समय सीमा—इन सब ने कार्यभार और तनाव को बहुत बढ़ा दिया है।
ऐसे में लेखपालों का आंदोलन केवल वेतन के लिए नहीं, बल्कि समूची राजस्व व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक माना जा रहा है।
प्रदर्शन में उपस्थित प्रमुख पदाधिकारी
दीपक त्रिपाठी – तहसील अध्यक्ष
किश बुंदेला – जिला अध्यक्ष
रविंद्र यादव – जिला मंत्री
गोविंद शुक्ला – जिला कोषाध्यक्ष
ब्लॉक अध्यक्ष
तहसील मंत्री
वरिष्ठ लेखपाल
बड़ी संख्या में सदस्य लेखपाल
स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया
तहसील प्रशासन ने बातचीत में बताया कि ज्ञापन को शासन स्तर तक भेज दिया जाएगा।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सभी मांगों को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए उचित स्तर पर अग्रसारित किया जाएगा।
निष्कर्ष
आज बाँदा तहसील परिसर में हुआ यह प्रदर्शन राज्य में लेखपालों की वास्तविक परिस्थितियों और उनकी उपेक्षित समस्याओं को उजागर करता है।
सरकार और प्रशासन के लिए यह महत्वपूर्ण संकेत है कि राजस्व व्यवस्था का केंद्र बिंदु माने जाने वाले इस संवर्ग की मांगों पर अब गंभीरता से विचार होना आवश्यक है।
यदि शासन उनकी समस्याओं का समाधान निकालता है, तो इससे न केवल लेखपालों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि राजस्व कार्यों की दक्षता, जनता को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की गति भी सुधरेगी।
लेखपाल संघ ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वे पीछे हटने वाले नहीं। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह इस महत्वपूर्ण संवर्ग की मांगों पर कितनी शीघ्रता और संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेती है।
