“सामाजिक न्याय—हमारे आंदोलन का केंद्र;
जब तक अंतिम व्यक्ति को न्याय नहीं मिलता, संविधान की यात्रा अधूरी है”
— राजेश कुमार सिद्धार्थ
संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के दौरान डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के अध्यक्ष और किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने सामाजिक न्याय को अपने आंदोलन का केंद्रीय मुद्दा घोषित किया। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करने वाला दस्तावेज है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, अवसर और सुरक्षा पहुँच सके।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि आज भी वंचित, कमजोर, दलित, पिछड़े, आदिवासी, किसान, मजदूर और गरीब वर्ग कई स्तरों पर असमानता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति समाज की अंतिम पंक्ति में खड़ा है, जब तक उसे न्याय नहीं मिलता, तब तक संविधान की यात्रा अधूरी है और लोकतंत्र मजबूत नहीं माना जा सकता।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ सामाजिक न्याय, समान अवसर और मानव गरिमा की बहाली के लिए प्रदेशभर में जन-जागरूकता का व्यापक अभियान चला रहा है। गांव–गांव और बस्ती–बस्ती में जाकर नागरिकों को उनके अधिकार, कर्तव्य और संवैधानिक मूल मूल्यों की जानकारी दी जा रही है। यही जागरूकता एक न्यायपूर्ण समाज की नींव तैयार करेगी।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि संगठन का संघर्ष किसी पार्टी या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय, असमानता और अधिकारों के हनन के विरुद्ध है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे सामाजिक न्याय की इस यात्रा में शामिल हों और संविधान के मूल संदेश—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—को मजबूत करें।

