माफियाओं का बना गढ़
बालोद में जैसे ही किसानों का फसल हर वर्ष की भांति कटती है और लकड़ी कोच्चिया ठेकेदार माफिया सक्रिय रूप से क्षेत्र में हावी हो जाते हैं और छोटे-छोटे किसनो पंचायत के सरपंचों के माध्यम से भोले भाले लोगों को बेवकूफ बनाकरऔने पौने रेट पर अवैध रूप से लकड़ी का सौदा कर कटाई धड़ले से करते हैं और अपनी निजी वहां से उन्हें बड़े-बड़े आरा मिलों में सप्लाई कर अवैध रूप से कमाई कर रहे हैं आज सक्रिय लकड़ी कोच्चिया जो शासन की प्रतिबंधित वृक्ष अर्जुन जिसे शासन द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है जिसे खुले आम कोसा गोंदी निवासी भोलू नामक व्यक्ति द्वारा कटिंग कर अवैध परिवहन किया जा रहा है जो सकृय रूप से गुरुर ब्लॉक में हर वर्ष कार्य करता है
शान द्वारा अर्जुन वृक्ष को और अन्य वृक्षों को भी बगैर परमिशन के काटने की अनुमति नहीं दी जा सकती फिर भी यह हाल हर वर्ष ऐसे छोटे बड़े व्यापारी लकड़ी कोच्चिया से लेकर लकड़ी माफिया बड़े-बड़े ठेकेदार अरामिल के व्यापारी सम्मिलित हैं इनको ना ही शासन का डर है ना ही प्रशासन का डर है और ना ही वन विभाग के अधिकारियों का डर है क्योंकि इनके द्वारा हमेशा खुलेआम काम करने के पीछे वन विभाग के भूमिका संरक्षण इनके सर पर हाथ रहती है यही कारण है कि
शासन हर वर्ष हर राज्य में लाखों करोड़ों वृक्ष रोपण के लिए खर्च कर रही है पर भी कुछ वन विभाग के ऐसे अधिकारी कर्मचारी हैं जो कुछ रूपयो के लिए शासन के पूरे नियमों को नजरअंदाज कर अपना स्वाभिमान को अपनी प्रतिष्ठा को राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं जो कि अनुचित है यह समाचार प्रकाशित की जा रही है कि भविष्य में वन विभाग के कर्मचारी सतर्क और अपनी स्वाभिमान को बचा सके शासन के करोड़ों रूपों को नुकसान से बचा सकें
