कान्हा से नौरादेही तक नर बाघ का सुरक्षित स्थानांतरण
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में मध्यप्रदेश की अहम पहल
बालाघाट मंडला 18 जनवरी 2026
वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ करने की दिशा में मध्यप्रदेश ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
कान्हा से नौरादेही तक नर बाघ का सुरक्षित स्थानांतरण
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में मध्यप्रदेश की अहम पहल
बालाघाट मंडला 18 जनवरी 2026
वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ करने की दिशा में मध्यप्रदेश ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कान्हा टाइगर रिजर्व से एक स्वस्थ नर बाघ को आज सुरक्षित रूप से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) स्थानांतरित किया गया। यह प्रक्रिया बाघ संरक्षण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन के निर्धारित मानकों के अंतर्गत संपन्न हुई।
उक्त नर बाघ को पूर्व में पेंच टाइगर रिजर्व के रूखड़ परिक्षेत्र, सिवनी से रेस्क्यू किया गया था। उस समय बाघ शावक की आयु लगभग 4 से 5 माह थी। बाद में उसका पालन-पोषण कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की स्थित घोरेला रिवाइल्डिंग बाड़े में किया गया, जहां उसे प्राकृतिक शिकार एवं स्वतंत्र विचरण के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया। वर्तमान में बाघ की आयु लगभग 33 से 35 माह है और वह पूर्णतः स्वस्थ पाया गया है।
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार बाघ को ऐसे संरक्षित क्षेत्र में छोड़े जाने का निर्णय लिया गया जहां बाघों का घनत्व कम हो और पर्याप्त प्राकृतिक आवास उपलब्ध हो। इस दृष्टि से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) को सर्वाधिक उपयुक्त माना गया।
स्थानांतरण से पूर्व वन्यप्राणी चिकित्सकों द्वारा बाघ को निश्चेत कर सभी आवश्यक जैविक मापदंडों का परीक्षण एवं अभिलेखीकरण किया गया। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 11(1)(ए) के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त कर बाघ को सेटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाया गया, जिससे उसकी सतत निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
यह संपूर्ण कार्यवाही रवीन्द्र मणि त्रिपाठी, भा.व.से., क्षेत्र संचालक, कान्हा टाइगर रिजर्व के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इस दौरान श पुनीत गोयल, भा.व.से., उप संचालक (कोर), सुश्री अमीथा के.बी., भा.व.से., उप संचालक (बफर), डॉ. संदीप अग्रवाल, वन्यप्राणी चिकित्सक, तथा डॉ. अनिरूद्ध मजूमदार सहित विशेषज्ञ दल उपस्थित रहा।
यह सफल स्थानांतरण मध्यप्रदेश में बाघ संरक्षण प्रयासों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय उपलब्धि माना जा रहा है।
