बहादुरगंज में सजी रंगों की चौपाल, केसरवानी वैश्य सभा के मंच से सौहार्द और संस्कृति का दिया गया संदेश
संगम नगरी प्रयागराज। गंगा, जमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम से पवित्र हुई धरती पर फाल्गुन की मस्ती कुछ अलग ही रंग बिखेर रही थी। बहादुरगंज स्थित ठाकुरदीन हाता रविवार को उस समय रंगों की ऐसी चौपाल में बदल गया, जहां हर तरफ अबीर-गुलाल उड़ रहा था, ढोलक की थाप गूंज रही थी और लोगों के चेहरों पर ऐसा उत्साह था मानो पूरा समाज एक ही परिवार बन गया हो। केसरवानी वैश्य सभा प्रयागराज द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में उमड़ा जनसैलाब इस बात का गवाह बना कि संगम की धरती पर त्योहार केवल मनाए नहीं जाते, बल्कि जीए जाते हैं। इसी उल्लास के बीच जब उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। फूलमालाओं, गुलाल और जयकारों के साथ उनका स्वागत हुआ। मंच पर पहुंचते ही उन्होंने हाथ उठाकर सबका अभिवादन किया तो लोगों ने भी रंग लगाकर उनका स्वागत किया, और देखते ही देखते माहौल पूरी तरह होलीमय हो गया। अपने संबोधन में मंत्री नन्दी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में त्योहार केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली सबसे मजबूत डोर हैं। उन्होंने कहा कि होली ऐसा महापर्व है जो दिलों के बीच की दूरी मिटा देता है। यहां कोई बड़ा-छोटा नहीं रहता, कोई ऊंच-नीच नहीं रहती, सब एक ही रंग में रंग जाते हैं। उन्होंने कहा कि होली हमें यह भी सिखाती है कि अन्याय और असत्य चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दे, अंत में सत्य और भक्ति की अग्नि में भस्म हो जाता है। यही संदेश हमें होलिका दहन से मिलता है और यही कारण है कि यह पर्व केवल रंगों का नहीं बल्कि विश्वास, साहस और प्रेम का पर्व है। मंत्री नन्दी ने कहा कि संगम नगरी प्रयागराज की पहचान ही भाईचारे और आस्था से है। यहां गंगा-जमुना की तहजीब के साथ सरस्वती की शांति भी बहती है, और यही कारण है कि यहां का हर त्योहार लोगों को और करीब लाता है। उन्होंने सभी से अपील की कि इस होली पर केवल रंग ही नहीं, बल्कि अपने मन के द्वेष भी धो डालें और प्रेम का रंग ऐसा लगाएं जो कभी फीका न पड़े। समारोह के दौरान पूरा ठाकुरदीन हाता हंसी-ठिठोली, गीत-संगीत और पारंपरिक होली के रंग में डूबा रहा। लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गले मिलते रहे और ऐसा लग रहा था मानो संगम की धरती पर फिर से पुरानी परंपराएं जीवंत हो उठी हों। इस अवसर पर महापौर गणेश केसरवानी, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, रजनीश केसरवानी, प्रेम नारायण केसरवानी, सुनीर केसरवानी, बैजनाथ केसरवानी, विवेक केसरवानी, जय प्रकाश आर्य, पार्षद नीरज गुप्ता, राजेश केसरवानी, सुरेंद्र कुमार गुप्ता, रवि कुमार गुप्ता सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। समारोह के अंत में हर किसी के चेहरे पर एक ही रंग था—प्रेम का रंग, जो संगम की धारा की तरह कभी सूखता नहीं।
