नालों पर डैम-गेट, पंपिंग स्टेशन और रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम लगेगा, संवेदनशील इलाकों का होगा संयुक्त सर्वे
प्रयागराज। बरसात के दौरान हर साल होने वाले जलभराव और अर्बन फ्लड की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। मंडल मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समन्वय बैठक में शहर के निचले और संवेदनशील क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए पंपिंग स्टेशन स्थापित करने, नालों पर डैम और गेट लगाने तथा आधुनिक स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की योजना को मंजूरी दे दी गई। बैठक में साफ कहा गया कि अब जलभराव की समस्या को अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी समाधान के साथ खत्म करने की दिशा में काम किया जाएगा। बैठक में नगर क्षेत्र के उन इलाकों की सूची पर चर्चा की गई जहां हर वर्ष बारिश के समय सड़कें तालाब बन जाती हैं और लोगों का आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। नगर निगम और संबंधित तकनीकी विभागों द्वारा चिन्हित स्थानों पर अतिरिक्त वर्षा जल की निकासी के लिए पंपिंग स्टेशन, नियंत्रित गेट और बैराज जैसी व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिससे पानी को तेजी से बाहर निकाला जा सके। अधिकारियों ने बताया कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण,अवैध निर्माण और पुराने प्राकृतिक जल निकासी मार्गों के बंद होने से शहर की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। पहले जहां पानी खुले मैदानों और नालों से निकल जाता था, वहां अब पक्के निर्माण होने से पानी भरने की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। इसी को देखते हुए नई योजना में पुराने जलमार्गों का अध्ययन, नए ड्रेनेज चैनल और नियंत्रित निकासी व्यवस्था शामिल की गई है। तकनीकी एजेंसी द्वारा तैयार प्रस्ताव में निर्माण कार्य के साथ-साथ पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव का खर्च भी जोड़ा गया है, ताकि योजना केवल कागजों तक सीमित न रहे और लंबे समय तक प्रभावी तरीके से चलती रहे। पंपिंग सिस्टम से निकलने वाले पानी की मात्रा पर नजर रखने के लिए फ्लो-मीटर लगाए जाएंगे, जबकि कंट्रोल पैनल को रिमोट मॉनिटरिंग से जोड़ा जाएगा, जिससे कंट्रोल रूम से ही पूरे सिस्टम की निगरानी की जा सकेगी। बैठक में यह भी तय किया गया कि किसी भी स्थान पर काम शुरू करने से पहले संबंधित विभागों की संयुक्त टीम मौके पर जाकर निरीक्षण करेगी और स्थानीय लोगों से भी राय ली जाएगी, ताकि बाद में विवाद या तकनीकी दिक्कत न हो। सभी कार्य पर्यावरण से जुड़े नियमों के अनुसार करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि योजना लागू होने के बाद शहर के निचले मोहल्लों, मुख्य सड़कों और जलभराव से प्रभावित कॉलोनियों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी और बरसात के समय होने वाली परेशानी में काफी कमी
