लेटे हनुमान मंदिर में महंत बलवीर गिरी ने दी घी-मोदक की आहुतियां, आध्यात्मिक आभा से भर उठा वातावरण
प्रयागराज। संगम नगरी एक बार फिर वैदिक मंत्रों की गूंज और आध्यात्मिक आभा से सराबोर हो उठी। विश्व कल्याण, मानवता की शांति और सुख- समृद्धि की कामना के साथ श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी के महंत बलवीर गिरी महाराज ने पांच दिवसीय विशेष वैदिक अनुष्ठान का भव्य शुभारंभ किया। आस्था और श्रद्धा के इस पावन अनुष्ठान की शुरुआत संगम तट स्थित प्रसिद्ध लेटे हुए बड़े हनुमान मंदिर से हुई, जहां सुबह से ही भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला। अनुष्ठान के पहले दिन मंदिर परिसर में वैदिक परंपराओं के अनुसार ‘अष्टद्रव्य गणपति हवन’ संपन्न हुआ। उत्तर और दक्षिण भारत से आए विद्वान ब्राह्मणों ने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ पूजन-अर्चन कराया। महंत बलवीर गिरी महाराज ने स्वयं हवन कुंड में कई किलो शुद्ध घी, मोदक और विशेष औषधियों की आहुति देकर भगवान गणपति से विश्व शांति और समाज की मंगलकामना की प्रार्थना की। हवन के दौरान वातावरण में गूंजते मंत्र, धूप- अगरबत्ती की सुगंध और श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। अनुष्ठान के क्रम में शुलीनी दुर्गे यंत्र पूजन,रुद्र हवन, तक्षक यंत्र पूजन तथा महासुदर्शन यंत्र पूजन भी विधि-विधान से संपन्न कराया गया। इसके साथ ही हनुमान मूल मंत्र का सामूहिक जप किया गया, जिससे मंदिर परिसर में भक्ति का अनुपम वातावरण बन गया। कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापना और अभिषेक की पवित्र प्रक्रिया भी पूरी की गई। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे महाअनुष्ठान न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संदेश भी फैलाते हैं। पांच दिनों तक चलने वाले इस विशेष वैदिक अनुष्ठान में प्रतिदिन अलग-अलग पूजन, हवन और मंत्रजाप के माध्यम से लोकमंगल की कामना की जाएगी। संगम नगरी में शुरू हुआ यह अनुष्ठान भक्तों के लिए आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक अनुभूति का अनूठा संगम बन गया है।
