अर्जुन रौतेला आगरा। साहित्य और संस्कृति के संवर्धन हेतु निरंतर सक्रिय “माधुर्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था” द्वारा ग्रीष्म ऋतु की पृष्ठभूमि पर एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। शहर के साहित्यप्रेमियों और वरिष्ठ कवियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक विशिष्ट ऊँचाई प्रदान की। वातावरण में जहाँ तपती दोपहर की बेचैनी थी, वहीं कवियों की संवेदनशील रचनाओं ने श्रोताओं के मन को भावों की शीतलता से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जय सिंह नीरद ने सत्य घटना पर आधारित कोमा में पहुँचे एक युवा की मनःस्थिति का मार्मिक वर्णन एक कविता के माध्यम से किया तो श्रोताओं की आँखों में आंसू आ गए कविता के बोल थे माँ तेरह सालों से टंगा हूँ घुप अंधेरे की एक नोंक पर
अध्यक्षता का दायित्व प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. राजेंद्र मिलन ने निभाते हुए कहा
सरकार क्यों खफा है, रासुका है मीसा है न जाने कौन कौन सी दफा है।
दोनों विद्वानों ने अपने उद्बोधनों में साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए कहा कि कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समय की धड़कनों को को स्वर देने का माध्यम है।
काव्य गोष्ठी में उपस्थित कवियों ने बढ़ती गर्मी, पर्यावरणीय असंतुलन, सामाजिक विसंगतियों, मानवीय संवेदनाओं के क्षरण तथा देश के गरमाते सामाजिक-राजनीतिक माहौल जैसे समसामयिक विषयों पर प्रभावशाली रचनाएँ प्रस्तुत कीं। कहीं तपती धरती की पीड़ा थी तो कहीं इंसानी रिश्तों में बढ़ती दूरियों का दर्द। कविताओं ने श्रोताओं को सोचने के लिए विवश किया और कई अवसरों पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम का आकर्षण तब और बढ़ गया जब संस्था की संस्थापिका अध्यक्ष एवं सक्रिय साहित्यकार निशि राज ने अपने प्रभावपूर्ण संचालन से पूरे आयोजन को जीवंत बनाए रखा। उन्होंने रामराज्य की अवधारणा पर आधारित अपनी ओजपूर्ण एवं संवेदनात्मक कविता प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हे मर्यादा पुरुषोत्तम हे धनुर्धारी श्री राम
पुनः अवतरण सत्य का हो सत् बिखराओ अभिराम।*
उनकी प्रस्तुति में आदर्श समाज, नैतिक मूल्यों और मानवीय करुणा का सुंदर चित्र उभरकर सामने आया..
समारोह में ब्रज के प्रसिद्ध कवि, ब्रज बिहारी बिरजू, डॉ. राजीव शर्मा निस्पृह, आचार्य उमाशंकर, रामेन्द्र शर्मा, दीपक श्रीवास्तव,प्रभुदत्त उपाध्याय, यशोयश, सुधा वर्मा, दुर्गेश पांडेय आदि की महती उपस्थिति रही।
