अमरिया। अमरिया तहसील क्षेत्र के रसूला फरदिया स्थित राम लुभाया भारत गैस ग्रामीण वितरक एजेंसी पर स्थानीय उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा है। कई दिन से सिलेंडर की कमी से परेशान लोग बार-बार एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें गैस नहीं मिल रही। इस बीच उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसी संचालक कालाबाजारी कर रहे हैं और सिलेंडर की सही आपूर्ति नहीं कर रहे।
उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें एजेंसी से केवल 100 सिलेंडर ही मिल रहे हैं, जबकि बाकी सिलेंडर ब्लैक में बेचे जा रहे हैं। यह स्थिति लोगों के लिए न केवल परेशानी का कारण बन रही है, बल्कि उनकी नाराज़गी भी बढ़ा रही है।
एजेंसी संचालक बताया कि 200 सिलेंडरों की दो गाड़ियां हमने न्यूरिया और मझोला भेज दी हैं अब हमारे पास कुल 150 सिलेंडर मौजूद हैं, जिसमें से 50 सिलेंडर आप जैसे भाईयों के लिए हैं। हालांकि इस बयान को उपभोक्ताओं ने कालाबाजारी की पुष्टि माना है। स्थानीय लोग अब संदेह में हैं कि क्या एजेंसी वास्तव में जनता के लिए सही मात्रा में गैस उपलब्ध करवा रही है या नहीं।
वही एजेंसी के कर्मचारियों ने बताया कि संचालक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे हैं और उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। इसलिए संचालक की बातों पर भरोसा ना । दोनों की बातों से साफ स्पष्ट होता है कि संचालक और कर्मचारी यों के बीच आपसी तालमेल की कमी है, जिससे उपभोक्ताओं के आरोप सत्य प्रतीत होते दिखाई दे रहे हैं।
इस पूरे विवाद पर अमरिया पूर्ति निरीक्षक मोहम्मद अनस ने कहा कि यदि एजेंसी संचालक की कथित बातें सही पाई जाती हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि जिले में गैस पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए अफवाहों और पैनिक में न आएँ।
हालांकि, स्थानीय उपभोक्ता अब भी सिलेंडर की सही आपूर्ति की मांग कर रहे हैं और एजेंसी पर सख्त नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार एजेंसी पर संपर्क किया, लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकला। अमरिया में यह मामला अब संवेदनशील रूप ले चुका है। उपभोक्ताओं की नाराज़गी बढ़ रही है और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई पर लोगों की निगाहें टिकी हैं। यह देखना बाकी है कि एजेंसी इस आरोप का सामना कैसे करती है और उपभोक्ताओं को कितनी जल्दी राहत मिलती है। लेकिन सवाल अब भी बरकरार है क्या एजेंसी सच में कालाबाजारी कर रही है या यह केवल अफवाह है? स्थानीय जनता और अधिकारी दोनों की निगाहें अब इस विवाद पर लगी हुई हैं।
