बांदा। संगठन कोई आकस्मिक उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर साधना का परिणाम होता है—और इस साधना का मूल तत्व है समर्पण। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय अभ्यास वर्ग में प्रांत प्रचारक श्री राम जी भाई साहब ने इसी भाव को केंद्र में रखते हुए कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संगठन की नींव समझौतों पर नहीं, बल्कि निष्ठा और समर्पण पर टिकी होती है। जो कार्यकर्ता अपने दायित्व को साधना मानकर कार्य करता है, वही संगठन को ऊँचाइयों तक ले जाने का सामर्थ्य रखता है।
यह भी प्रतिपादित किया कि संगठन का विस्तार केवल वाचालता से संभव नहीं है। बड़ी-बड़ी बातें और घोषणाएं क्षणिक प्रभाव तो उत्पन्न कर सकती हैं, किंतु स्थायी शक्ति नहीं बन सकतीं। इसके विपरीत, जब कार्यकर्ता छोटे-छोटे समूहों में, जमीनी स्तर पर, निरंतर और निष्ठापूर्वक कार्य करता है, तभी संगठन का वास्तविक और स्थायी विकास संभव होता है। यह एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें धैर्य, अनुशासन और निरंतरता अनिवार्य तत्व हैं।कानपुर के नौबस्ता स्थित परितोष इंटरनेशनल कॉलेज में आयोजित इस आवासीय प्रशिक्षण वर्ग में बांदा जनपद से जिला अध्यक्ष पंकज सिंह सहित 15 पदाधिकारियों ने सहभागिता की। जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह अभ्यास वर्ग केवल प्रशिक्षण का मंच नहीं, बल्कि आत्ममंथन और नवचेतना का अवसर सिद्ध हुआ। दो दिनों के इस प्रवास ने कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा, नई दृष्टि और संगठन के प्रति गहन उत्तरदायित्व का बोध जागृत किया है।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षण से प्राप्त इस ऊर्जा को अब जनपद बांदा में क्रियान्वित किया जाएगा, जहां प्रत्येक पदाधिकारी संगठन की रीति-नीति को आत्मसात करते हुए उसे नई दिशा और गति देने का प्रयास करेगा।अभ्यास वर्ग में बांदा से डॉ. शिव प्रकाश सिंह, पंकज सिंह, विनोद कुमार शिवहरे, संतोष कुमार मिश्र, मनोज सिंह, रामनरेश, श्वेतराज, सुनील कुमार रैकवार, अभय प्रताप, रणवीर, डॉ. ओम प्रकाश, ममता सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने सहभागिता कर इस वैचारिक यज्ञ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
