पीलीभीत जनपद में एवियन एन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) के संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में गांधी सभागार में जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें बीमारी की रोकथाम एवं बचाव के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई।
बैठक में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि बर्ड फ्लू एक खतरनाक वायरस जनित बीमारी है, जो मुख्यतः एच-5 और एच-7 वायरस से फैलती है। यह एक जूनोटिक रोग है, जो पक्षियों से मनुष्यों और अन्य पशुओं में भी संक्रमण फैला सकता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि पड़ोसी देश नेपाल के दो शहरों में बर्ड फ्लू के मामले सामने आने के बाद सीमावर्ती जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को अलर्ट मोड में रहते हुए निगरानी बढ़ाने और आवश्यक सभी एहतियाती कदम तत्काल लागू करने को कहा। उन्होंने पक्षियों में दिखने वाले लक्षणों—जैसे दाना कम खाना, अंडा उत्पादन में कमी और श्वास संबंधी समस्याओं—पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही कुक्कुट पालन करने वालों को अपने फार्म में जैव सुरक्षा, साफ-सफाई और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की सख्त हिदायत दी गई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई व्यक्ति संक्रमित पक्षी के संपर्क में आता है तो वह तुरंत चिकित्सकीय सलाह ले। इसके अलावा गौशालाओं में भी हराचारा, स्वच्छ पेयजल और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने संबंधित विभागों को आमजन के बीच बर्ड फ्लू से बचाव की सावधानियों के प्रति व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए, ताकि समय रहते संक्रमण को रोका जा सके।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी (वि./रा.), मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला विकास अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला पंचायतराज अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन का संदेश साफ है सतर्कता ही बचाव है, लापरवाही भारी पड़ सकती है।

