पीलीभीत जनपद के विकासखंड अमरिया के ग्राम पंचायत सरैंदा पट्टी में कराए गए इंटरलॉकिंग सड़क और नाली निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालिया बारिश के बाद जैसे ही पानी उतरा, वैसे ही निर्माण की गुणवत्ता की असल तस्वीर सामने आ गई—सड़क की ईंटें और सीमेंट (मसाला) अलग-अलग दिखाई देने लगे, जिससे घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोप तेज हो गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में शुरू से ही मानकों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो ग्राम प्रधान की ओर से दबाव और धमकी दी गई। ग्रामीणों के मुताबिक, विरोध करने पर उन्हें यह तक कहा गया— “कुछ भी कर लो, मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।” इस कथित बयान ने गांव में आक्रोश और असंतोष को और भड़का दिया है।
वहीं, मामले में ग्राम प्रधान पति सादिक रजा ने आरोपों को खारिज करते हुए अलग तर्क दिया है। उनका कहना है कि सड़क पर लोगों और बच्चों द्वारा डंडों से चलने के कारण निर्माण को नुकसान पहुंचा, जिससे रेत हट गई और ईंटें उभरकर दिखने लगीं।
इधर, ग्राम पंचायत अधिकारी विरेंद्र कुमार गंगवार ने बताया कि उन्हें मामले की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि निर्माण में अनियमितता या गुणवत्ता में कमी पाई गई, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला केवल एक गांव का नहीं, बल्कि पंचायत स्तर पर चल रहे विकास कार्यों की निगरानी और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारियों को समय पर जानकारी ही नहीं होती, तो गुणवत्ता की जांच कैसे सुनिश्चित होगी? अब सबकी नजर प्रशासन पर टिकी है—क्या होगी जांच, और क्या मिल पाएगा ग्रामीणों को न्याय?
