सीतापुर/सिधौली, 11 अप्रैल। समता, शिक्षा और सामाजिक न्याय के महान प्रवर्तक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के पावन अवसर पर डॉ. अंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं किसान कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष, 152 विधानसभा सिधौली, जनपद सीतापुर के नेता राजेश कुमार सिद्धार्थ ने भावपूर्ण संबोधन जारी करते हुए उन्हें शत-शत नमन किया।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने अपने संदेश में कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले का जीवन त्याग, संघर्ष और सामाजिक क्रांति की ऐसी मिसाल है, जो सदैव समाज को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि फुले ने उस समय समाज में व्याप्त छुआछूत, जातिगत भेदभाव और अज्ञानता के विरुद्ध आवाज उठाई, जब ऐसा करना अत्यंत कठिन था। उन्होंने न केवल विरोध का सामना किया, बल्कि अपने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प से समाज को नई दिशा दी।
उन्होंने कहा कि महात्मा फुले का यह विचार कि “बिना संघर्ष के कोई परिवर्तन संभव नहीं है” आज भी उतना ही प्रासंगिक है। समाज में व्याप्त असमानता को समाप्त करने के लिए हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो समाज अपने महापुरुषों के विचारों को भूल जाता है, वह कभी प्रगति नहीं कर सकता।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने शिक्षा के क्षेत्र में महात्मा फुले के योगदान को विशेष रूप से याद करते हुए कहा कि वर्ष 1848 में जब लड़कियों की शिक्षा की कल्पना भी नहीं की जाती थी, तब उन्होंने पहला बालिका विद्यालय खोलकर एक ऐतिहासिक क्रांति की शुरुआत की। उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को शिक्षित कर उन्हें देश की पहली महिला शिक्षिका बनाया, जो उनके त्याग और दूरदर्शिता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि महात्मा फुले ने सत्यशोधक समाज की स्थापना कर समाज को अंधविश्वास और पाखंड से मुक्त करने का कार्य किया। यह संगठन आज भी सामाजिक समानता और न्याय के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि महात्मा फुले का जीवन हमें यह सिखाता है कि समाज में बदलाव लाने के लिए केवल विचार ही नहीं, बल्कि साहस और संघर्ष की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे महापुरुषों के विचारों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए आगे आएं।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि आज के समय में जब समाज विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब महात्मा फुले के विचार हमें सही दिशा दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, समानता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही एक सशक्त और समतामूलक समाज की नींव हैं।
उन्होंने आगे कहा कि डॉ. अंबेडकर संवैधानिक महासंघ द्वारा अप्रैल माह को महापुरुषों के सम्मान और उनके विचारों के प्रचार-प्रसार के रूप में मनाया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरणा मिल सके।
अंत में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले का त्याग और संघर्ष कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं और एक ऐसे समाज का निर्माण करें, जहां सभी को समान अधिकार और सम्मान मिले।
महात्मा ज्योतिबा फुले को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन।
