महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर में राष्ट्रीय कैडेट कोर 102 यू.पी. बटालियन द्वारा ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर ध्वजारोहण, शहीदों को श्रद्धांजलि, डॉक्यूमेंट्री फिल्म स्क्रीनिंग तथा राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत वक्तव्यों के माध्यम से देश के वीर सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान को स्मरण किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसमें देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों के साहस, संघर्ष और बलिदान को मार्मिक रूप में प्रस्तुत किया गया। फिल्म के प्रदर्शन के दौरान उपस्थित विद्यार्थियों एवं अतिथियों की आंखें नम हो उठीं और पूरा सभागार राष्ट्रभक्ति के भाव से ओतप्रोत हो गया।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता जिला प्रचारक सिंहपाल सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी राष्ट्र की शक्ति केवल उसकी सैन्य क्षमता में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा में निहित होती है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि भारत की अखंडता, सुरक्षा और स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने जीवन में अनुशासन, सेवा और समर्पण के मूल्यों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि आज का युवा यदि अपने इतिहास, संस्कृति और सैनिकों के बलिदान को समझ ले, तो भारत विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बन सकता है।सिंहपाल सिंह ने आगे कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक केवल अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं। ऐसे वीर जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने एनसीसी कैडेट्स की सराहना करते हुए कहा कि एनसीसी युवाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।कार्यक्रम में आयुर्वेद प्राचार्य डॉ. गिरिधर वेदान्तंम ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे सैनिक आधुनिक भारत के वास्तविक नायक हैं, जिनके त्याग और समर्पण के कारण देश सुरक्षित और सशक्त बना हुआ है।ऑपरेशन सिंदूर जैसे आयोजन नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना जागृत करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।ए.एन.ओ. लेफ्टिनेंट डॉ. संदीप कुमार श्रीवास्तव ने ऑपरेशन सिंदूर” के महत्व को विस्तार से बताते हुए कहा कि यह अभियान भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि शहीद कभी मरते नहीं, बल्कि वे राष्ट्र की चेतना में सदैव जीवित रहते हैं। ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि देश की सुरक्षा और सम्मान बनाए रखने के लिए असंख्य सैनिक अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं। हमें उनके बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए। आपरेशन सिंदूर से प्रेरणा लेते हुए कैडेट्स ने देश और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने का संकल्प लिया।अंत में सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित किया।संचालन कैडेट शनि जायसवाल ने किया। कार्यक्रम का नेतृत्व सीनियर अंडर ऑफिसर सागर जायसवाल ने किया। आयोजन में प्रमुख रूप से सार्जेंट विकास यादव, अतिका तिवारी, आकांक्षी राय, दीप्ति सिंह, प्राची राय, नैन्शी श्रीवास्तव , अभिषेक मिश्रा, आलोक दीक्षित, अरुण विश्वकर्मा, अंश पाल , गुड़िया कुशवाहा, दिव्यांश सिंह, निलेश यादव, अनुभव पाण्डेय, शिखर पाण्डेय, अर्पिता राय , शुभम सिंह, सत्यप्रकाश साहनी, अमित कुमार गुप्ता, अनुराधा , आस्था यादव, उत्कर्ष ओझा उपस्थित रहे।
