रीवा : गुढ़
मध्य प्रदेश सरकार जहां एक तरफ ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है वहीं दूसरी तरफ रीवा जिले के जनपद पंचायत रायपुर कर्चुलियान अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत हरदी नंबर 1 में भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी गई हैं।यहां विकास कार्य सिर्फ कागजों तक सीमित हैं और सरकारी खजाने से लाखों-करोड़ों रुपए का आहरण कर निजी स्वार्थों की पूर्ति की जा रही है।प्रकृतिभक्त समाचार पत्र की खोजी टीम द्वारा किए गए विस्तृत खुलासे में यह बात सामने आई है कि पंचायत की वर्तमान सरपंच रामकली कोल और सचिव रामगोपाल साकेत की जुगलबंदी में पूरी पंचायत को घोटालों के दलदल में धकेल दिया गया है।ग्रामीणों की मानें तो पंचायत का पूरा कार्यभार सरपंच पति तुलसीदास कोल द्वारा संभाला जाता है जो अपने कथित राजनीतिक रसूख और सत्ताधारी नेता होने का धौंस दिखाकर अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं और जांच फाइलों को दबाए बैठे हैं।
घोटालों की लंबी फेहरिस्त बिंदुवार खुलासा
*1.*बस्ती वासियों की सुविधा के लिए डगर्रा टोला यादव बस्ती में चार लाख उन्नीस हजार रुपए की लागत से एक सार्वजनिक चबूतरे का निर्माण स्वीकृत किया गया था।लेकिन धरातल पर इस चबूतरे का नामोनिशान तक नहीं है।सरपंच-सचिव और सरपंच-पति की तिकड़ी ने मिलकर अलग-अलग किस्तों में इस पूरी राशि का आहरण कर लिया।ग्रामीणों को उम्मीद थी कि वहां एक सुंदर चबूतरा बनेगा लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनके हक का पैसा भ्रष्टाचारियों की जेब में चला जाएगा।
*2.*ग्राम पंचायत हरदी नंबर 1 में ग्रामीणों को रात के अंधेरे से निजात दिलाने के लिए स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर लाखों रुपए के सरकारी बजट का आहरण किया गया।विडंबना देखिए कि सरकारी दस्तावेजों में पूरा गांव दूधिया रोशनी से जगमगा रहा है जबकि जमीनी हकीकत यह है कि आज भी गांव की गलियां अंधेरे के आगोश में हैं।ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें गांव में कहीं भी कोई नई स्ट्रीट लाइट दिखाई नहीं दे रही है।
3. सबसे संवेदनशील और शर्मनाक घोटाला गौवंशों के संरक्षण को लेकर हुआ है।वर्ष 2022 से लेकर सितंबर 2025 तक, गौवंशों के चारे-पानी और व्यवस्थाओं के नाम पर शासन द्वारा पंद्रह लाख साठ हजार रुपए की भारी-भरकम राशि जारी की जा चुकी है।लेकिन इस राशि का एक हिस्सा भी मूक पशुओं के कल्याण पर खर्च नहीं हुआ।वर्तमान में गौशाला के आसपास दर्जन भर से अधिक गोवंशों के नरकंकाल बिखरे पड़े हैं,जो यह साबित करने के लिए काफी हैं कि यहां गायों को तड़पा-तड़पाकर मारा जा रहा है और उनका हक भ्रष्टाचारी डकार रहे हैं।
*4.*रसूखदार सरपंच-पति तुलसीदास कोल ने अपनी राजनीतिक धौंस के बल पर गांव की शासकीय उचित मूल्य की दुकान को भी अपने पूर्ण नियंत्रण में ले रखा है।गरीबों के मुंह का निवाला छीनने के इस खेल में खाद्यान्न घोटाले का आरोप भी सिद्ध हो चुका है। बावजूद इसके राजनीतिक रसूख और प्रशासनिक सांठगांठ के कारण इस घोटाले की फाइल को ठंडे बस्ते में दबाकर रखा गया है ताकि दबंगों पर कोई आंच न आए।
कलेक्टर की सख्ती बेअसर कार्रवाई का इंतजार
रीवा जिले के वर्तमान कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी अपनी प्रशासनिक सख्ती और जीरो टॉलरेंस नीति के लिए जाने जाते हैं।लेकिन आश्चर्य की बात है कि हरदी नंबर 1 पंचायत के इन बेखौफ भ्रष्टाचारियों पर कलेक्टर साहब की सख्ती का भी कोई असर नहीं दिख रहा है।सत्ता की हनक और रसूख के बल पर ये कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं।
प्रकृतिभक्त समाचार का संकल्प जारी रहेगा पर्दाफाश
जैसे ही इन सभी घोटालों की पुख्ता जानकारी प्रकृतिभक्त समाचार पत्र को मिली हमारी टीम ने पर्दे के पीछे छुपे हुए इन सभी कारनामों को प्रमाण सहित उजागर करना शुरू कर दिया है। यह तो सिर्फ शुरुआत है। खोजी टीम के पास अभी ऐसे कई और गंभीर बिंदु और दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं, जिन्हें बहुत जल्द आम जनता के सामने और उच्चाधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा ताकि दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
अब तक इंडिया प्रदीप पांडेय
