यूपी पंचायत चुनाव संघर्ष मोर्चा 2026
आदरणीय साथियों, किसान भाइयों, नौजवानों, माताओं और बहनों,
आज हम सब यहाँ एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर एकजुट हुए हैं, जो हमारे गांव, हमारी पंचायत और हमारे लोकतंत्र की जड़ों से जुड़ा हुआ है।
हम सब जानते हैं कि पंचायतें हमारे देश के लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव हैं। पंचायत को हम “गांव की सरकार” कहते हैं। यही सरकार गांव के विकास की दिशा तय करती है—सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और रोजगार जैसे मूलभूत मुद्दों को आगे बढ़ाती है।
लेकिन आज एक गंभीर सवाल हमारे सामने खड़ा है—क्या पंचायत चुनाव समय पर हो रहे हैं?
जब हमारे संविधान में यह स्पष्ट व्यवस्था है कि पंचायतों का गठन निर्धारित समय सीमा यानी पाँच वर्षों के भीतर होना चाहिए, तो फिर चुनावों में देरी क्यों हो रही है? यह प्रश्न हर जागरूक नागरिक के मन में उठ रहा है।
समय पर चुनाव न होने का सीधा असर गांव के विकास पर पड़ता है। पंचायतें कमजोर होती हैं, प्रशासनिक काम रुकते हैं, और सबसे अधिक नुकसान हमारे गरीब, किसान, मजदूर और आम ग्रामीण जनता को होता है।
हम यह कहना चाहते हैं कि लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं है, बल्कि जनता की शक्ति है। और जब यह शक्ति समय पर जनता को वापस नहीं मिलती, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं।
इसी स्थिति को देखते हुए “यूपी पंचायत चुनाव संघर्ष मोर्चा 2026” का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य किसी के खिलाफ संघर्ष करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना है।
हम सरकार और चुनाव आयोग से यह मांग करते हैं कि पंचायत चुनाव बिना किसी देरी के, निर्धारित समय पर कराए जाएं, ताकि गांव की सरकार मजबूत हो सके और विकास कार्यों में गति आ सके।
हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारा आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहेगा। हमारा उद्देश्य किसी प्रकार की अराजकता नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और जनता के अधिकारों की रक्षा है।
साथियों,
यह समय एकजुट होने का है, आवाज उठाने का है और लोकतंत्र को मजबूत करने का है। अगर गांव मजबूत होगा, तो देश मजबूत होगा।
आइए हम सब मिलकर संकल्प लें—
कि हम अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए जागरूक रहेंगे,
हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखेंगे,
और गांव की सरकार को समय पर मजबूत बनाने की मांग करते रहेंगे।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।
जय हिंद, जय भारत।
राजेश कुमार सिद्धार्थ
