एक बोरी खरीदी, सिस्टम में चढ़ा दी गई चार बोरियां, किसान की खाद लिमिट हुई समाप्त
रिपोर्ट सुधीर वर्मा अब तक न्याय
महमूदाबाद/सीतापुर। जनपद सीतापुर के विकासखंड महमूदाबाद क्षेत्र से खाद कालाबाजारी, आधार प्रमाणीकरण के दुरुपयोग और विभागीय जांच में कथित फर्जीवाड़े का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम शिवरुख खुर्द, ग्राम पंचायत पहाड़ापुर निवासी किसान विनय शर्मा पुत्र उमाकांत शर्मा द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत ने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली और खाद वितरण व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित किसान ने आरोप लगाया है कि चतुर्वेदी ट्रेडर्स सदरपुर द्वारा उसके आधार प्रमाणीकरण का दुरुपयोग करते हुए फर्जी तरीके से अतिरिक्त खाद चढ़ाकर उसकी सरकारी खाद लिमिट समाप्त कर दी गई, जिससे वह समय पर खेती के लिए खाद लेने से वंचित हो गया।
क्या है पूरा मामला
शिकायतकर्ता विनय शर्मा ने जिलाधिकारी सीतापुर को दी गई अपनी शिकायत में बताया कि दिनांक 26 जनवरी 2026 को वह चतुर्वेदी ट्रेडर्स सदरपुर की दुकान पर केवल एक बोरी यूरिया खरीदने गया था। दुकानदार ने उससे आधार प्रमाणीकरण करवाया और ₹400 लेकर एक बोरी यूरिया दी। आरोप है कि किसान के दुकान से चले जाने के बाद दुकानदार ने उसी आधार प्रमाणीकरण का दुरुपयोग करते हुए तीन बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी अतिरिक्त रूप से पीओएस मशीन में चढ़ा दी।
किसान के अनुसार इस फर्जी एंट्री की जानकारी उसे सरकारी इनवॉइस एसएमएस के माध्यम से हुई। लेकिन असली समस्या तब सामने आई जब 18 मई 2026 को वह अपनी सहकारी समिति से खाद लेने पहुंचा और वहां उसकी आधार लिमिट पूरी तरह समाप्त दिखाई गई। इससे उसे खेती के लिए जरूरी खाद नहीं मिल सकी।
जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज हुई शिकायत
पीड़ित किसान ने 18 मई 2026 को जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, जिसकी संदर्भ संख्या 400015426038358 बताई गई है। शिकायत भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और विभागीय योजनाओं में लापरवाही की श्रेणी में दर्ज हुई। किसान ने मांग की कि चतुर्वेदी ट्रेडर्स के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए, उसका लाइसेंस निलंबित किया जाए तथा उसकी आधार खाद लिमिट में सुधार कराया जाए।
शिकायत के साथ किसान ने सरकारी एसएमएस का स्क्रीनशॉट भी साक्ष्य के रूप में संलग्न किया।
उपनिदेशक कृषि ने भेजा जिला कृषि अधिकारी को प्रकरण
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपनिदेशक कृषि विभाग द्वारा 20 मई 2026 को यह प्रकरण जिला कृषि अधिकारी सीतापुर को निस्तारण हेतु प्रेषित किया गया। लेकिन जब शिकायतकर्ता को संतोषजनक समाधान नहीं मिला तो 26 मई 2026 को पुनः असंतुष्ट फीडबैक मिलने पर मामला उच्च अधिकारियों के परीक्षण हेतु अग्रसारित कर दिया गया।
जांच अधिकारी की आख्या पर उठे सवाल
प्रकरण की जांच विषय वस्तु विशेषज्ञ (एसएमएस) महमूदाबाद कौशल सिंह द्वारा की गई। जिला कृषि अधिकारी सीतापुर को भेजी गई अपनी आख्या में उन्होंने उल्लेख किया कि किसान को खरीफ बुवाई हेतु आवश्यकता अनुसार खाद उपलब्ध करा दी गई है तथा दुकानदार का कहना है कि किसान के पास पर्याप्त पैसा न होने के कारण वह शेष उर्वरक नहीं ले जा सका था। रिपोर्ट में यह भी लिखा गया कि किसान पूर्ण रूप से संतुष्ट है।
हालांकि शिकायतकर्ता ने इस पूरी रिपोर्ट को “झूठी, फर्जी और तथ्यहीन” बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
किसान बोला — “मुझे कोई खाद नहीं मिली, जांच अधिकारी ने दबाव बनाया”
ऑनलाइन दर्ज अपनी प्रतिक्रिया में शिकायतकर्ता विनय शर्मा ने कहा कि जांच अधिकारी ने न तो निष्पक्ष जांच की और न ही वास्तविक तथ्यों को रिपोर्ट में शामिल किया। किसान का आरोप है कि उसे दुकान से खाद उठाने के लिए फोन पर दबाव बनाया गया और जब उसने दुकानदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की तो दुर्भावनावश फर्जी आख्या लगाकर शिकायत बंद करने की संस्तुति कर दी गई।
शिकायतकर्ता ने साफ कहा कि उसे कोई खाद उपलब्ध नहीं कराई गई और न ही वह जांच से संतुष्ट है। किसान ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी आधार लिमिट का गलत इस्तेमाल कर खाद की कालाबाजारी की गई लेकिन दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित किसान ने प्रशासन से मांग की है कि:
* फर्जी आख्या को तत्काल निरस्त किया जाए,
* किसी उच्च अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराई जाए,
* चतुर्वेदी ट्रेडर्स का लाइसेंस रद्द किया जाए,
* दोषी जांच अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए,
* तथा किसान की खाद लिमि…
