कुछ भी नाटक हो सकता है, लेकिन विरह नाटक नहीं हो सकता : कथावाचक
अर्जुन रौतेला आगरा। जनपद आगरा के बल्केश्वर पार्क में रसोई रतन परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिवस कथा व्यास कथावाचक इन्द्रेश जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी संदेश देते हुए कहा कि वास्तविक मनुष्य वही है जिसके जीवन में प्रतिदिन चुनौतियां आती हैं और वह उनका साहस एवं धैर्य के साथ सामना करता है। संघर्ष ही व्यक्ति को मजबूत बनाता है तथा उसे जीवन में सफलता के मार्ग पर अग्रसर करता है।
श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे मंगलाचरण के अवसर पर महाराज श्री ने भगवान श्रीकृष्ण एवं भक्तों के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने विरह की महत्ता बताते हुए कहा कि संसार में बहुत सी बातें नाटक हो सकती हैं, लेकिन विरह कभी नाटक नहीं हो सकता। विरह की अनुभूति हृदय की गहराइयों से उत्पन्न होती है और यही भावना भक्त को भगवान के अधिक निकट ले जाती है।
कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति रस में डूबे रहे। महाराज श्री ने बताया कि भगवान की भक्ति, सेवा और सत्संग मनुष्य जीवन को सार्थक बनाते हैं तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और संस्कारों का प्रसार करते हैं।
श्रीमद्भागवत कथा के मुख्य आयोजक राजेश अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत सम्मान किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा के माध्यम से धर्म, भक्ति एवं मानव जीवन के मूल्यों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन एवं जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
