आमोद कुमार
आमोद कुमार
बांदा लखनऊ। बदलते समय में सूचना का माध्यम जितना तेज हुआ है, उतनी ही बढ़ी है प्रमाणिक और विश्वसनीय जानकारी की आवश्यकता। इसी दिशा में उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल "सूचना प्रवाह" का शुभारंभ किया है। इसका उद्घाटन सूचना निदेशक विशाल सिंह और अपर सूचना निदेशक अरविंद कुमार मिश्र ने लोक भवन, लखनऊ में किया।
इस अवसर पर निर्माता फिल्म अभय कुमार श्रीवास्तव, फिल्म निर्माण प्रबंधक संदीप पांडेय सहित विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।"सूचना प्रवाह" केवल एक यूट्यूब चैनल नहीं, बल्कि डिजिटल युग में सरकार और जनता के बीच संवाद का एक नया मंच है। इसके माध्यम से प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास परियोजनाओं, नीतिगत निर्णयों, उपलब्धियों तथा जनहितकारी कार्यक्रमों से जुड़ी प्रमाणिक, तथ्यपरक और त्वरित जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाएगी। साथ ही विभाग द्वारा निर्मित वृत्तचित्र, विशेष रिपोर्ट, प्रेरणादायी वीडियो और सरकारी अभियानों का भी नियमित प्रसारण किया जाएगा।आज सूचना की दुनिया में सबसे बड़ी चुनौती सूचना की कमी नहीं, बल्कि विश्वसनीय सूचना की उपलब्धता है। सोशल मीडिया के इस युग में अफवाहें और अपुष्ट जानकारियां तेजी से फैलती हैं। ऐसे में यदि सरकारी विभाग स्वयं एक आधिकारिक डिजिटल मंच के माध्यम से प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराते हैं, तो यह पारदर्शिता और जनविश्वास दोनों को मजबूत करता है।सूचना निदेशक विशाल सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल मीडिया जनसंचार का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है और "सूचना प्रवाह" सरकार और जनता के बीच संवाद का एक सशक्त सेतु सिद्ध होगा। वहीं अपर सूचना निदेशक अरविंद कुमार मिश्र ने कहा कि विभाग आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए जनसंचार के नए आयाम स्थापित कर रहा है और यह मंच प्रदेश की विकास यात्रा को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाएगा।सूचना केवल शब्दों का प्रवाह नहीं होती, वह समाज की चेतना का दर्पण भी होती है। यदि सूचना सटीक हो, समय पर हो और सहज भाषा में हो, तो वह शासन और नागरिकों के बीच विश्वास की एक मजबूत कड़ी बन जाती है।सूचना प्रवाह" नाम भी अपने आप में एक प्रतीक है—जैसे नदी का निर्मल जल अपने किनारों तक जीवन पहुंचाता है, वैसे ही यह डिजिटल मंच प्रदेश के कोने-कोने तक शासन की योजनाओं, उपलब्धियों और जनहित की सूचनाओं को पहुंचाने का प्रयास करेगा।
डिजिटल युग में यह पहल केवल तकनीकी विस्तार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद को और अधिक सशक्त, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
