घर छोड़ने की जिद, पुलिस की संवेदनशीलता और मां की आंखों में लौटती मुस्कान
आमोद कुमार
बांदा। किशोरावस्था का आवेग कई बार घर की चौखट से बाहर तो ले जाता है, लेकिन दुनिया की भीड़ में वह कदम अक्सर असुरक्षा के अंधेरे में भटकने लगते हैं। ऐसे समय यदि वर्दी केवल कानून की नहीं, बल्कि संवेदना की भी पहचान बन जाए, तो बिछड़े रिश्तों की डोर फिर से जुड़ जाती है। कुछ ऐसा ही उदाहरण जीआरपी बांदा ने प्रस्तुत किया, जहां एक नाराज किशोर को तलाशकर उसकी मां की सूनी आंखों में फिर से सुकून लौटा दिया।
रेलवे पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश तथा पुलिस अधीक्षक रेलवे एवं पुलिस उपाधीक्षक रेलवे झांसी के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान के तहत जीआरपी बांदा की टीम ने प्रभारी निरीक्षक हरीनाथ सिंह के नेतृत्व में घर से नाराज होकर निकले 17 वर्षीय कपिल कुशवाहा को सकुशल खोज निकाला।कपिल, ग्राम सिंघौली, थाना तिंदवारी का रहने वाला है। पारिवारिक नाराजगी में वह घर छोड़कर रेलवे स्टेशन बांदा पहुंच गया था। सूचना मिलते ही जीआरपी ने प्लेटफॉर्म, सर्कुलेटिंग एरिया और स्टेशन परिसर के विभिन्न हिस्सों में खोजबीन शुरू की। अथक प्रयासों के बाद किशोर को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।इसके बाद पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। मां मीरा कुशवाहा जब थाने पहुंचीं और अपने बेटे को सकुशल देखा, तो उनकी आंखों की बेचैनी राहत में बदल गई। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने किशोर को उसकी मां और परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
यह घटना केवल एक बालक की बरामदगी नहीं, बल्कि उस मानवीय जिम्मेदारी का उदाहरण है जो बताती है कि पुलिस का दायित्व केवल अपराधियों तक सीमित नहीं, बल्कि भटके हुए कदमों को सही राह तक पहुंचाना भी है। जब कानून संवेदना के साथ चलता है, तब समाज का भरोसा और मजबूत होता है।
इस सराहनीय कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक हरीनाथ सिंह, हेड कांस्टेबल शैलेन्द्र प्रताप सिंह, कांस्टेबल प्रारूप कुमार, कांस्टेबल अंकित कुमार तथा महिला कांस्टेबल सीतू सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। परिजनों ने जीआरपी बांदा की तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीय कार्यशैली की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।

