मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की घटना निंदनीय — न्यायपालिका की गरिमा पर प्रहार
लखनऊ, बहुजन संगठक ब्यूरो।
देश की राजधानी में मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यह कृत्य न केवल न्यायपालिका की गरिमा का अपमान है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर भी गहरा प्रहार है।
डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि न्यायालय देश की न्याय व्यवस्था का सर्वोच्च स्तंभ है, और इस प्रकार का असम्मान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। “न्यायपालिका देश के नागरिकों को न्याय का विश्वास दिलाती है, और उस पर हमला लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा प्रहार है,” उन्होंने कहा।
घटना के बाद आरोपी को मौके पर ही सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार कर लिया। अदालत परिसर में कुछ समय के लिए हड़कंप की स्थिति रही। न्यायालय प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के आदेश दिए हैं।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने आगे कहा कि विचारों के मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन असहमति व्यक्त करने का तरीका हमेशा संवैधानिक और अहिंसक होना चाहिए। उन्होंने समाज से अपील की कि किसी भी परिस्थिति में न्यायपालिका और उसके पदाधिकारियों के प्रति असम्मान का भाव नहीं रखना चाहिए।
“बहुजन संगठक” का स्पष्ट मत है कि इस तरह की घटनाएँ न केवल न्याय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाती हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती हैं। लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी वर्गों को संयम और जिम्मेदारी से आचरण करना आवश्यक है।
