एनडीए की रणनीति: “अलग-अलग प्रचार, एक ही लक्ष्य”
धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक साथ मंच साझा न करना “रणनीति का हिस्सा” है, मतभेद का नहीं।
यह संदेश देने की कोशिश है कि गठबंधन में कोई दरार नहीं है, बल्कि यह “सोच-समझकर किया गया विभाजन” है ताकि ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों तक प्रभावी प्रचार पहुंच सके।
प्रधान ने यह भी याद दिलाया कि पीएम मोदी और नीतीश पहले ही कई संयुक्त सरकारी कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं।
2. नीतीश कुमार पर विश्वास और “अहम” की बात
जब उनसे पूछा गया कि अगर नीतीश कुमार फिर से नाराज़ हो गए तो क्या होगा, तो प्रधान ने इस सवाल को पूरी तरह शांत तरीके से खारिज करते हुए कहा—
“नीतीश कुमार को अहंकारी कहना अन्याय है।”
उन्होंने नीतीश को “परिपक्व और दृढ़ दिमाग वाला नेता” बताया और कहा कि एनडीए एक “सामाजिक गठबंधन” है, केवल राजनीतिक नहीं।
यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि जेडीयू-बीजेपी रिश्ते पहले कई बार टूट चुके हैं। प्रधान का यह रुख मतदाताओं को “स्थिरता” का संदेश देने का प्रयास है।
3. महिला और युवा मतदाता निर्णायक
प्रधान ने यह स्वीकार किया कि इस चुनाव में महिला और युवा वर्ग सबसे निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर ये वर्ग NDA के पक्ष में हैं क्योंकि उन्हें “नेतृत्व पर भरोसा” है।
यह बयान बीजेपी की उस रणनीति से मेल खाता है जिसमें महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार और सशक्तिकरण को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया गया है।
4. तेजस्वी यादव के “हर घर नौकरी” वादे पर हमला
प्रधान ने इस वादे को “आर्थिक रूप से असंभव और अव्यावहारिक” बताया।
उनका तर्क था कि अगर बिहार के 2.75 करोड़ परिवारों को सरकारी नौकरी दी जाए, तो उसका खर्च राज्य के कुल बजट से कई गुना अधिक होगा।
उन्होंने इसे “सूरज, चांद और तारे देने जैसा वादा” कहा — जो सीधे तौर पर जनता को “अवास्तविक सपने” दिखाने का आरोप है।
यह हमला तेजस्वी यादव के जनाधार को कमजोर करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है, खासकर युवाओं के बीच।
5. राहुल गांधी पर तीखा प्रहार
धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी के “जनरेशन Z” वाले बयान पर तीखा जवाब दिया और कहा कि राहुल “सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए” हैं।
उन्होंने कांग्रेस और गांधी परिवार पर आरोप लगाया कि वे “संविधान, चुनाव आयोग और न्यायपालिका का अपमान” करते हैं।
प्रधान का यह बयान भाजपा की पुरानी रणनीति के अनुरूप है — राहुल गांधी को अभिजात्य, असंवेदनशील और अहंकारी दिखाना।
6. नीतीश कुमार के स्वास्थ्य और सक्रियता पर सफाई
प्रधान ने यह कहकर नीतीश की फिटनेस पर उठ रहे सवालों को खारिज किया कि वे “हर दिन 250 किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं” और “उनकी ऊर्जा पहले जैसी है।”
यह बयान जनता में नीतीश की उम्र और स्वास्थ्य को लेकर उठे संदेहों को दूर करने के लिए दिया गया है।
7. “दो चेहरे, एक विजन” — मोदी और नीतीश
प्रधान ने कहा कि बिहार में एनडीए की पहचान “दो चेहरों” से है — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।
यह बात पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं को संतुलित करने का प्रयास है, ताकि यह संदेश जाए कि दोनों नेताओं के बीच कोई टकराव नहीं, बल्कि पूरक संबंध है।
निष्कर्ष
धर्मेंद्र प्रधान के इस इंटरव्यू से तीन बातें साफ़ झलकती हैं—
एनडीए एकता का संदेश: जेडीयू-बीजेपी के बीच मतभेदों की अफवाहों को शांत करना।
युवाओं और महिलाओं पर फोकस: इन्हें निर्णायक वोट बैंक के रूप में केंद्र में रखना।
विपक्ष पर हमले: तेजस्वी यादव को “झूठे वादों” का प्रतीक और राहुल गांधी को “अहंकारी अभिजात्य” दिखाने की कोशिश।
यह पूरा बयान बिहार चुनाव के अंतिम चरणों से पहले एनडीए की एकजुटता, स्थिरता और विकास-केन्द्रित छवि को मजबूत करने का एक सुनियोजित प्रयास प्रतीत होता है।
