जिस समाज में महिलाएँ सुरक्षित नहीं, वह समाज लोकतांत्रिक नहीं;
युवा ही संविधान के सच्चे रक्षक हैं;
जो हाथ भारत को भोजन देता है, वह आज सबसे असुरक्षित है—यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना है।”
— राजेश कुमार सिद्धार्थ
संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित विस्तृत कार्यक्रमों और जन-जागरूकता सभाओं में डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के अध्यक्ष एवं किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने समाज, लोकतंत्र और संविधान के प्रति अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान, समानता और अधिकारों की वास्तविक गारंटी से मजबूत होता है। जब इन मूल स्तंभों में दरारें पड़ती हैं, तो लोकतांत्रिक चेतना कमजोर हो जाती है।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने सबसे पहले महिलाओं की स्थिति पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस समाज में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं, वह समाज खुद को लोकतांत्रिक कहने का नैतिक अधिकार खो देता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा और समान अवसर किसी भी सभ्य समाज की पहचान होते हैं, और इन मोर्चों पर गिरावट लोकतंत्र के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान महिलाओं को समान अधिकार, सुरक्षा और स्वतंत्रता की गारंटी देता है, और यह उन मूलभूत सिद्धांतों में से है जिन्हें कमजोर नहीं होने दिया जा सकता।
इसके बाद उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा ही संविधान के सच्चे रक्षक हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि युवा जाग जाए, तो किसी भी शक्ति में लोकतंत्र को पराजित करने की क्षमता नहीं रहती। युवाओं के भीतर ऊर्जा, क्षमता, सत्य के प्रति प्रतिबद्धता और परिवर्तन की ताकत होती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को इतिहास, संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय के महत्व को समझना होगा, क्योंकि देश का भविष्य उनके हाथों में है। उनकी जागरूकता और सक्रिय भागीदारी से ही लोकतंत्र मजबूत और जीवंत रह सकता है।
किसानों की स्थिति पर बोलते हुए राजेश कुमार सिद्धार्थ ने अत्यंत गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, जो हाथ भारत को भोजन देता है, वह आज सबसे असुरक्षित है। यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना है। किसान देश की रीढ़ है, लेकिन नीतिगत असमानता, आर्थिक संकट, कर्ज का बोझ, न्यूनतम समर्थन मूल्य की अनिश्चितता और खेती की घटती सुरक्षा उन्हें लगातार कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि जब किसान असुरक्षित होगा, तो समाज, अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र—तीनों असंतुलित हो जाएंगे।
उन्होंने बताया कि डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ पूरे प्रदेश में महिलाओं, युवाओं, किसानों, मजदूरों और वंचित समाज के अधिकारों की रक्षा को लेकर अभियान चला रहा है। इस अभियान के तहत गांव–गांव में संविधान पाठ, जागरूकता सभाएँ, अधिकार शिक्षा कार्यक्रम, संवाद सत्र और विशेष बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। संगठन का लक्ष्य है कि प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों को समझे, उनके संरक्षण के लिए आवाज उठाए और संविधान की मूल भावना से परिचित हो।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने यह भी कहा कि कोई भी लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी सुरक्षित रहती है जब नागरिक अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों। उन्होंने कहा कि आंदोलन, जागरूकता और संगठन केवल सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के लिए होते हैं। संविधान प्रत्येक नागरिक को सम्मानजनक जीवन का अधिकार देता है, और उस अधिकार की रक्षा करना किसी समूह या दल का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति, दल या सत्ता के खिलाफ नहीं, बल्कि उन विचारों, नीतियों और परिस्थितियों के खिलाफ है जो सामाजिक न्याय, समानता, मानव गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि संविधान का सम्मान तभी संभव है जब हर नागरिक, विशेषकर युवा और महिलाएँ, अपराध, भेदभाव, असमानता और अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस दिखाएँ।
अपने समापन संदेश में उन्होंने जनता से आह्वान किया कि लोकतंत्र की सुरक्षा केवल संविधान को पढ़ने से नहीं, बल्कि उसकी मूल भावना को जीवित रखने से होगी। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय, महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं की जागरूकता और किसानों की सम्मानजनक स्थिति—इन चारों स्तंभों के बिना लोकतंत्र पूर्ण नहीं हो सकता।
अंत में उन्होंने दोहराया कि संविधान का संदेश गांव–गांव और व्यक्ति–व्यक्ति तक पहुँचाना संगठन का मिशन है, और इस मिशन में समाज का हर वर्ग सहभागी बने।

