कानपुर में प्राइवेट कंपनी की लापरवाही से सड़क पर मौत का खतरा, नगर निगम की कार्यशैली पर उठे सवाल
ब्यूरो चीफ — सुजीत कुमार, कानपुर नगर
कानपुर। शहर में विकास कार्यों की आड़ में जिम्मेदार विभागों की उदासीनता लगातार जनता की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। माल रोड स्थित मरी कंपनी पुल के पास प्राइवेट कंपनी द्वारा सड़क पर लगभग 5 से 6 फीट गहरा गड्ढा खोदकर बिना किसी सुरक्षा प्रबंध के छोड़ दिया गया है। यह गड्ढा न तो बैरिकेडिंग से घिरा है, न ही किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। बीच सड़क पर खुले पड़े इस गहरे गड्ढे ने राहगीरों और वाहन चालकों की जान पर वास्तविक खतरा पैदा कर दिया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी यहां बार-बार खुदाई करते हैं, लेकिन काम पूरा किए बिना ही वहां से चले जाते हैं। कई दिनों से गड्ढा जस का तस पड़ा है। दूसरी ओर, नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचने के बजाय कागजी औपचारिकताओं में ही व्यस्त दिखते हैं। लोगों का आरोप है कि निगम प्रशासन की लापरवाही और प्राइवेट कंपनी की मनमानी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
हर दिन हजारों की संख्या में वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। दिन में तो किसी तरह लोग संभल जाते हैं, लेकिन रात के समय कम रोशनी के चलते यह गड्ढा किसी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों में बेहद डर का माहौल है। उनका कहना है कि सड़क एकदम सामान्य दिखाई देती है, लेकिन अचानक सामने यह गहरा गड्ढा आ जाता है, जो किसी भी वक्त बड़े हादसे को जन्म दे सकता है।
मरी कंपनी पुल के आसपास रहने वाले दुकानदार और स्थानीय लोग बताते हैं कि उन्होंने कई बार नगर निगम को शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन अब तक कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया। न तो गड्ढा भरा गया और न ही अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था की गई। लोगों का कहना है कि जब तक किसी बड़े हादसे की खबर न आए, तब तक विभागीय अधिकारियों की नींद नहीं खुलती।
स्थानीय निवासियों ने साफ कहा है कि यदि समय रहते इस गड्ढे को बंद नहीं किया गया या उस पर उचित सुरक्षा इंतज़ाम नहीं किए गए, तो किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी सीधे नगर निगम और प्राइवेट कंपनी पर होगी। लोगों का आरोप है कि शहर में विकास कार्यों के नाम पर बजट तो खर्च किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी और जवाबदेही का अभाव बना रहता है।
इधर, क्षेत्र के नागरिकों में बढ़ती नाराजगी के बीच अब सबकी निगाहें नगर निगम की कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या अधिकारी अपने AC कमरों से बाहर निकलकर मौके पर पहुंचेंगे और समस्या का समाधान करेंगे, या फिर शहर की जनता इसी तरह जोखिम उठाती रहेगी? यह देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर कब कदम उठाता है।

