ग्राम छतौनी के राजापुर में कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध, प्रदूषण और शोर से परेशान लोग
हंसराज वर्मा, तहसील रिपोर्टर महमूदाबाद, सीतापुर
सीतापुर जिले के रामपुर मथुरा विकासखंड की ग्राम पंचायत छतौनी के राजापुर गांव में ग्रामीणों ने एक नई संचालित कंपनी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम बेला में स्थित यह कंपनी अपने बॉयलर से अत्यधिक शोर उत्पन्न कर रही है, गोबरहिया नदी में दूषित पानी छोड़ रही है और आसपास के खेतों की फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, कंपनी का निर्माण कार्य लगभग 18 महीने पहले शुरू हुआ था, लेकिन इसका संचालन दो महीने पूर्व ही आरंभ हुआ है। कंपनी में एल्कोहल बनाने का कार्य किया जाता है। संचालन शुरू होते ही कंपनी से निकलने वाले शोर, अपशिष्ट और बदबू ने गांव और आसपास के क्षेत्रों का वातावरण प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
राजापुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में करीब 50 बच्चे पढ़ते हैं। विद्यालय के अध्यापकों ने बताया कि कंपनी के बॉयलर से निकलने वाले तेज शोर के कारण बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो जाता है। कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि अध्यापकों की आवाज बच्चों तक नहीं पहुंच पाती, जिससे कक्षाओं का संचालन बाधित होता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही स्थिति जारी रही, तो बच्चों की शिक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
गोबरहिया नदी में छोड़ा जा रहा दूषित पानी
ग्रामीणों की दूसरी प्रमुख शिकायत कंपनी द्वारा गोबरहिया नदी में छोड़े जा रहे गंदे पानी को लेकर है। यह नदी लंबे समय से गांव में पशुओं को पानी पिलाने, नहलाने और घरेलू उपयोग के लिए महत्वपूर्ण स्रोत रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी के अपशिष्ट जल के सीधे नदी में गिरने से पानी दूषित हो गया है, जिससे पशु बीमार पड़ रहे हैं और नदी किनारे का वातावरण भी दूषित हो रहा है।
फसलों पर उड़कर पहुंच रहा अपशिष्ट, कृषि को नुकसान
स्थानीय किसानों ने बताया कि कंपनी से उड़कर आने वाला राख जैसा अपशिष्ट खेतों में फैल रहा है। इससे फसलों पर एक परत जमा हो जाती है, जो पौधों के विकास को प्रभावित कर रही है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो उनकी उपज बर्बाद हो सकती है, जिससे आर्थिक नुकसान तय है।
तेज शोर से ग्रामीण परेशान
ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी में लगे बॉयलर का शोर इतना अधिक है कि दिन में सामान्य बातचीत तक करना कठिन हो जाता है। वहीं, रात में शोर के कारण लोगों की नींद प्रभावित होती है। कई ग्रामीणों ने आशंका जताई कि लगातार तेज ध्वनि प्रदूषण से उन्हें सुनने की क्षमता में कमी आ सकती है।
ग्रामीणों ने दी चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि यह मामला केवल प्रदूषण का नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, आजीविका और बच्चों की शिक्षा से जुड़ा हुआ है।
सतीश बाजपेई, ललित मिश्रा, राजू शुक्ला, शिवम मिश्रा, सुरेंद्र शुक्ला, बलराम शुक्ला, स्वयंवर शुक्ला, सिहाते शुक्ला, उन्नी शुक्ला, देशराज शुक्ला और रोहित मिश्रा सहित कई ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से प्रशासन से भ्रष्टाचार और प्रदूषण नियंत्रण मानकों की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

