महाराजगंज हिंसा: रामगोपाल मिश्र हत्याकांड में दोषियों को कठोर सजा, मुख्य आरोपी को मृत्युदंड
बहराइच। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा द्वितीय ने गुरुवार शाम महाराजगंज हिंसा से जुड़े चर्चित रामगोपाल मिश्र हत्याकांड के दोषियों को सजा सुनाते हुए कहा कि निहत्थे नवयुवक की नृशंस हत्या ने समाज में गहरी अशांति और अस्थिरता उत्पन्न की। अदालत ने मुख्य आरोपी सरफराज उर्फ रिंकू को मृत्युदंड और अन्य दोषियों को कठोर सजा सुनाते हुए टिप्पणी की कि इस घटना ने सामाजिक व्यवस्था को झकझोर दिया था।
अदालत ने निर्णय में उल्लेख किया कि पीड़ित के शरीर पर गोलियां चलाकर उसे छलनी कर देना तथा पैरों को इस कदर जलाना कि नाखून तक बाहर निकल आए, अत्यंत क्रूर कृत्य था। न्यायाधीश ने कहा कि घटना ने न केवल मानवता को प्रभावित किया, बल्कि एक वर्ग की आस्था और विश्वास को भी गहरी चोट पहुंचाई। हत्याकांड के अगले दिन फैली व्यापक हिंसा समाज में उपजे तनाव की गंभीरता दिखाती है।
फैसले में मनुस्मृति के श्लोक ‘दंड शास्ति प्रजा: सर्वा…’ का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि दंड का भय ही समाज में अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखता है। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे अपराधियों के प्रति कठोर दंड आवश्यक है ताकि समाज में कानून के प्रति विश्वास बढ़े और भविष्य में ऐसे कृत्यों पर रोक लगे।
142 पन्नों में दर्ज फैसला
अदालत ने 142 पन्नों में विस्तृत निर्णय लिखा है, जिसमें 12 गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य शामिल हैं। सभी तथ्यों और परिस्थितियों का मूल्यांकन करने के बाद दोषियों को दोषसिद्ध माना गया।
फैसला सुनाते ही निब तोड़ दी
निर्णय सुनाने के बाद प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा द्वितीय ने मुख्य आरोपी को मृत्युदंड सुनाते ही अपने पेन की निब तोड़ दी। अदालत में मौजूद लोगों के बीच इस क्षण ने भारी सन्नाटा पैदा कर दिया।

