कन्नौज। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशा वर्करों की समस्याओं को लेकर ग्रामीण महिला एवं बाल कल्याण आशा एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश ने शासन का ध्यान आकृष्ट किया है। एसोसिएशन ने बताया कि प्रदेश में लाखों आशा वर्कर मातृ-शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, टीकाकरण व सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभा रही हैं, इसके बावजूद उन्हें न तो सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही नियमित मानदेय।एसोसिएशन जिला अध्यक्ष रानी का कहना है कि आशा वर्करों से अत्यधिक कार्य लिया जाता है, लेकिन उसके अनुपात में बेहद कम प्रोत्साहन राशि दी जाती है, वह भी अक्सर वर्षों तक लंबित रहती है। इससे आशा वर्करों का आर्थिक व मानसिक शोषण हो रहा है।मांगों में आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने, तब तक 25 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने, महिला अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों पर आशा विश्राम कक्ष की व्यवस्था करने तथा हाईस्कूल-इंटरमीडिएट पास आशाओं को एएनएम प्रशिक्षण देने की मांग शामिल है। एसोसिएशन ने शासन से मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।
