गाँव फिर एक बार चौपाल बना है,वादों का मेला सजा है आज,हर प्रत्याशी सेवा का पुजारी,
हर गली में गूँज रहा है राज।
नाली, सड़क, पानी, बिजली,
मुद्दे जो बरसों से खामोश थे,
चुनाव आते ही जाग उठे,
जैसे ये भी मतदाता हों खास से।
कल तक जो नेता दिखता न था,
आज हर घर का रिश्तेदार,
हाथ जोड़कर बोले मुस्काकर—
आप ही मालिक, आप ही सरकार।
महिला पूछे—पानी कब आएगा?
युवा बोले—रोज़गार दो,
जवाब में बस भाषण मिलता है,
विकास अभी पोस्टर में सो।
जाति का गणित, टोले की गिनती,
हर वोट का अलग हिसाब,
गाँव का भविष्य चुपचाप खड़ा,
देख रहा सत्ता का ख़्वाब।
मतदान के बाद खामोशी है,
माइक, बैनर सब आराम,
जनता फिर से इंतज़ार में,
विकास पूछ रहा अपना नाम।
फिर भी उम्मीद ज़िंदा है गाँव में,
लोकतंत्र की यही पहचान,
ग्राम पंचायत सिर्फ कुर्सी नहीं,
सेवा, संवेदना और सम्मान।
जो जीतकर गाँव को भूलेगा,
वो अगली बार याद रखा जाएगा,
गाँव की सत्ता सवाल पूछती है,
इतिहास में वही लिखा जाएगा।
✍️ गिरजा शंकर अवस्थी
मंडल ब्यूरो — अब तक लाइव इंडिया न्यूज़
चित्रकूट धाम
