प्रदेश में भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वाली सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बीच पीलीभीत के बीसलपुर क्षेत्र से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। ग्राम सादिया में संचालित एक ईंट भट्ठा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बंदी आदेश के बावजूद धड़ल्ले से चल रहा है और काला धुआं उगलकर आसपास के वातावरण को जहरीला बना रहा है। हैरानी की बात यह है कि प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी इस पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने हाल ही में निरीक्षण के दौरान पाया था कि संबंधित भट्ठा वायु प्रदूषण के मानकों का गंभीर उल्लंघन कर रहा है। इसके बाद बोर्ड ने तत्काल प्रभाव से भट्ठे को बंद करने, बिजली-पानी आपूर्ति काटने और जुर्माना लगाने के निर्देश जारी किए थे। लेकिन आदेश जारी होने के बाद भी भट्ठा संचालक पर कोई असर नहीं दिखा और भट्ठा अब भी लगातार संचालित हो रहा है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में यह भट्ठा प्रशासनिक आदेशों को ठेंगा दिखा रहा है।
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब यह सामने आता है कि भट्ठे की चिमनी से महज करीब 20 मीटर की दूरी पर एक सरकारी प्राइमरी स्कूल स्थित है। नियमों के अनुसार किसी भी शिक्षण संस्थान के पास इस तरह के प्रदूषणकारी उद्योगों का संचालन प्रतिबंधित है।
इसके बावजूद भट्ठे से निकलने वाला काला धुआं और उड़ती राख पूरे दिन स्कूल परिसर में फैलती रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे वहां पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है और वे सांस संबंधी बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। उनका आरोप है कि प्रशासन की सख्ती केवल गरीबों तक ही सीमित रहती है, जबकि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।ग्रामीणों का कहना है कि अगर किसी गरीब का छोटा सा अवैध निर्माण होता तो अब तक बुलडोजर चल चुका होता, लेकिन यहां प्रदूषण फैलाने वाले भट्ठे पर कार्रवाई नहीं की जा रही। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार इस मामले की शिकायत शासन स्तर तक भेजने की तैयारी की जा रही है। यदि ऐसा हुआ तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो सकती है।अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में तत्काल कार्रवाई कर सादिया के बच्चों को जहरीली हवा से राहत दिलाता है, या फिर प्रदूषण बोर्ड के आदेश भी कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।
