ग्राम पंचायत मुड़ियारा में प्रधान पर मनरेगा घोटाले और सरकारी नलकूप हटाने के आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश
लोकेशन: मलिहाबाद, लखनऊ
संवाददाता: अनुज कुमार
लखनऊ जनपद की तहसील मलिहाबाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मुड़ियारा में ग्राम प्रधान सुषमा मौर्य पर गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की मिलीभगत से मनरेगा योजनाओं और अन्य सरकारी कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही है। इसको लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने प्रशासन से जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा कार्यों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। गांव में कई जगह काम दिखाए गए हैं, जबकि वास्तव में कुछ कार्य ग्राम प्रधान के निजी घर पर कराए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कार्यस्थल पर मजदूरों की उपस्थिति न होने के बावजूद रजिस्टर में हाजिरी लगाई जा रही है और मजदूरी का भुगतान भी फर्जी नामों पर किया जा रहा है। इससे मनरेगा जैसी गरीबों के लिए चलाई जा रही योजना का लाभ वास्तविक पात्रों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि ग्राम प्रधान द्वारा सरकारी नलकूपों को उखाड़कर अपनी मनमर्जी के स्थानों पर लगवाया जा रहा है। जिन स्थानों पर पहले ये नलकूप थे, वहां के किसान और ग्रामीण अब सिंचाई की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नलकूपों को हटाने का कार्य बिना किसी अनुमति और ग्राम सभा की सहमति के किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला पूरी तरह से मनमानी और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
गांव के लोगों का कहना है कि प्रधान और सचिव की मिलीभगत से विकास कार्यों में अनियमितताएं की जा रही हैं। जिन योजनाओं के लिए सरकार लाखों रुपये भेजती है, उनका सही उपयोग न होकर केवल कागजों पर खर्च दिखाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत करने पर भी स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं होती, जिससे लोगों में नाराजगी और निराशा बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की तैयारी की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं की गई तो वे जिलाधिकारी लखनऊ से मिलकर ज्ञापन सौंपेंगे और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करेंगे।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते नहीं, बल्कि गांव के हित में यह आवाज़ उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता नहीं रखी गई और भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लगी, तो गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगों का विकास अधूरा ही रह जाएगा।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि ग्रामीणों की शिकायत लिखित रूप में आती है, तो जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हुई हैं कि क्या सरकार और अधिकारी इस मामले में ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।
