हरिओम बाल्मीकि हत्याकांड: भीड़ की हिंसा ने छोड़े गहरे सवाल, राहुल की मुलाकात में उजागर हुआ दबाव
लव सिंह यादव/अब तक न्याय
अगर शक के आधार पर भीड़ किसी की जान लेगी, तो अदालतों और कानून की क्या जरूरत? क्या यह अनियंत्रित हिंसा नया न्याय बन जाएगी?
बिना सबूत हरिओम को मार डाला गया। क्या शक अब इंसानियत से बड़ा हो गया है?
अगर भीड़ का डंडा कानून से पहले चलेगा, तो कोई सुरक्षित नहीं। आज हरिओम, कल कोई और। क्या हम सब भीड़ का शिकार बनने को तैयार हैं?
हरिओम की चीख “राहुल गांधी” और भीड़ का जवाब “हम बाबा के लोग हैं” राजनीतिक कट्टरता की भयावह तस्वीर दिखाता है। क्या इंसानियत की कोई कीमत नहीं बची?
हरिओम की हत्या मानवता की हत्या है। कब तक जाति और शक इंसानियत से बड़े रहेंगे?
(फतेहपुर/ उत्तर प्रदेश):रायबरेली के ऊंचाहार में दलित युवक हरिओम बाल्मीकि की मॉब लिंचिंग ने समाज और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 1-2 अक्टूबर की रात चोर समझकर भीड़ ने 38 वर्षीय हरिओम को बेरहमी से पीटकर रेलवे ट्रैक पर अधमरा छोड़ दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।वायरल वीडियो में हरिओम की चीखें “राहुल गांधी, राहुल गांधी” सुनाई दीं, जवाब में भीड़ बोली, “हम बाबा के लोग हैं।” इस घटना ने सामाजिक पूर्वाग्रहों और राजनीतिक कट्टरता की खाई को उजागर किया। शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पीड़ित परिवार से मुलाकात में प्रशासन पर दबाव के आरोप सामने आए, जबकि सरकार ने आर्थिक सहायता और नौकरी का भरोसा दिया।
शक में बुझी जान:- भयावह मंजर फतेहपुर के तुराब अली का पुरवा निवासी हरिओम, जो मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नहीं थे, ससुराल जा रहे थे। गदागंज थाना क्षेत्र की नई बस्ती में पहरा दे रहे ग्रामीणों ने उन्हें चोर समझकर घेर लिया। वायरल वीडियो के मुताबिक, हरिओम को आधा नंगा कर बांधा गया, लाठियों से पीटा गया और रेलवे ट्रैक पर छोड़ दिया गया। परिवार का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही ने उनकी जान ले ली। रायबरेली पुलिस ने 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी अविनेश सिंह शामिल है, लेकिन सात अभी फरार हैं। हत्या, दंगा और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज है।
राहुल की मुलाकात- प्रशासन पर दबाव का खुलासा 17 अक्टूबर को राहुल गांधी ने फतेहपुर में हरिओम के परिवार से 25 मिनट तक बात की। हरिओम के पिता छोटे लाल और भाई शिवम ने बताया कि प्रशासन ने उन पर राहुल से न मिलने का दबाव बनाया। एक वीडियो, वायरल हुआ, जिसमें शिवम कहते दिखे, “हम सरकार से संतुष्ट हैं।” परिवार ने इसे प्रशासन की धमकी का नतीजा बताया, जिसमें सरकारी सहायता बंद करने की बात कही गई। राहुल ने परिवार को कोर्ट में पैरवी और सुरक्षा का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा, “दलितों पर अत्याचार संविधान पर हमला है। हम न्याय के लिए लड़ेंगे।” मुलाकात से पहले भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग थी। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इसे “प्रशासन की साजिश” करार दिया।
परिवार की पुकार - “सजा दो, सुकून दो” संगीता और उनकी बेटी अनन्या ने कहा, “सभी हत्यारों को सजा मिले, तभी हरिओम की आत्मा को शांति मिलेगी।” परिवार ने गांव में दलितों की सुरक्षा और मॉब लिंचिंग के खिलाफ सख्त कानून की मांग की। सामाजिक संगठन APCR ने स्वतंत्र जांच की मांग की है।
समाज का आईना: त्रासदियां कब रुकेंगी? हरिओम की हत्या ने समाज को कटघरे में खड़ा किया। अगर ऐसी घटनाएं दोहराई गईं, तो हर इंसान भीड़ का शिकार बन सकता है। यह एक व्यक्ति की मौत नहीं, मानवता पर चोट है।
हरिओम मर गए, लेकिन उनके सवाल जिंदा हैं—क्या हम उस इंसान को जगा पाएंगे, जो भीतर मर चुका है?
समाज और सरकार को जवाब देना होगा, वरना ऐसी त्रासदियां रुकेंगी नहीं।
