सीतापुर के कमलापुर महोली स्थित मां महोठे रानी मंदिर पर एक माह तक चलने वाले मेले का इस वर्ष दो अप्रैल से प्रारंभिक तरीके से शुभारंभ हो रहा है मां महोठे रानी के चबूतरे पर श्रद्धालुओं द्वारा परंपरा अनुसार मिट्टी की मटकी और सुहाग की सामाग्री अर्पित की जाती है
यहां आने वाने श्रद्घालुओं में महिलाओं की संख्या अधिक रहती है मां के दरबार में सच्चे मन से आकर लोग मनौती मांगते है कहा जाता है कि यहां आने वाले हर किसी की मनोकामना पूरी होती है
जब मनोकामना पूरी होती है तो श्रद्धालु यहां पर महिलाओं के लिए दुरकइयां और कन्या भोज का आयोजन करते हैं प्रसाद के रूप में
यहां मिट्टी की छोटी हांडी मां को अर्पित की जाती है मेले में आस पास के जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं मेले की सुरक्षा को लेकर भारी पुलिस बल तैनात रहता है रेलवे लाइन के किनारे बड़े बगीचे
में मां महोठे रानी का दरबार है
बाग में चबूतरे पर बिराजमान हैं दरबार की देखरेख कसमण्डा स्टेट द्वारा की जाती है मंदिर की स्थापना
के विषय में स्थानीय लोगों का मानना है कि महोली गाँव के महोठा सिंह की मैया महोठे रानी बेटी थी इनकी शादी महासेन के साथ हुई थी
मुगलों से युद्ध के दौरान डेंगरा में महासेन शहीद हो गए थे तब महोली में मुगल सैनिक मैया महोठे रानी को
ले जाने के लिए आए थे स्थानीय सैनिकों ने मां महोठे रानी की मुगल सैनिकों से रक्षा की थी रक्षा करते हुए पासी समुदाय के सैनिक बीसरदार शहीद हुए थे बाद में मां महोठे रानी सती हो गई थी तभी से मां का यह दरबार श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा का केंद्र बन गया बाद में
कसमण्डा स्टेट द्वारा मां महोठे रानी का मंदिर बनवाया गया मंदिर बनने पर मां ने राज परिवार व पुजारी को स्वपन में कहा कि हम बाहर चबूतरे पर रहेंगे हमारा पूजन बीसरदार के परिवरीजन करेंगे तब से बीसरदार के परिजन पुजारी की भूमिका में हैं
