आगरा। जनपद आगरा के नाई सराय, जलेसर रोड़ स्थित श्रीचंद्र बाबा फार्म हाउस में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिवस में कथावाचक बालयोगी ब्रह्मानंद जी महाराज ने कहा कि भक्त ध्रुव की कथा हमको यह महत्वपूर्ण शिक्षा देती है कि ईर्ष्या (जलन) भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है।
राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव को अपनी सौतेली माता के तिरस्कार का सामना करना पड़ा। यह परिस्थिति उनके जीवन में दुख और आघात लेकर आई, लेकिन उन्होंने ईर्ष्या या द्वेष का मार्ग नहीं अपनाया। इसके विपरीत, उन्होंने भगवान की भक्ति को अपना लक्ष्य बनाया और कठोर तपस्या कर दिव्य स्थान प्राप्त किया।
कथावाचक बताते हैं कि यदि ध्रुव ईर्ष्या में पड़ जाते, तो वे कभी भी उस उच्च आध्यात्मिक स्तर तक नहीं पहुंच पाते। उनकी सफलता का रहस्य यही था कि उन्होंने नकारात्मक भावनाओं को त्यागकर भक्ति, धैर्य और समर्पण को अपनाया।
महाराज जी ने कहा कि संदेश स्पष्ट है कि ईर्ष्या मन को अशांत करती है और भक्ति से दूर ले जाती है।
सच्ची भक्ति के लिए मन को निर्मल और सकारात्मक रखना आवश्यक है।
ध्रुव की तरह विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए।
इस प्रकार, ध्रुव की कथा हमें सिखाती है कि ईर्ष्या को त्यागकर यदि हम भक्ति के मार्ग पर चलें, तो जीवन में शांति और सफलता दोनों प्राप्त हो सकती हैं।
कथा के मुख्यरूप से भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं पूर्व एत्मादपुर विधायक रामप्रताप सिंह चौहान, मनोनीत पार्षद पंकज सिकरवार, धर्मेंद्र सिंह, अशोक सिकरवार, सतीश चंद्र (सचिव), अनिल सिकरवार, भूरी सिंह (तानगढ़ी), त्रिलोकी, सोनू, यतेंद्र सिंह, मान सिंह, भूपेंद्र चौहान आदि ग्रामवासियों ने श्रीमद्भागवत कथा का रसपान किया।
