आमोद कुमार
बांदा जिलाधिकारी अमित आसेरी की अध्यक्षता में तहसील सदर बाँदा में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस एक बार फिर प्रशासन और जनता के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बना। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से जुड़ी समस्याओं को सुनते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता न बने, बल्कि समयबद्धता और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित की जाएं।समाधान दिवस में विद्युत, राजस्व, पुलिस, विकास एवं आपूर्ति विभाग से संबंधित कुल 90 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 14 मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। यह आंकड़ा प्रशासनिक सक्रियता को दर्शाता है, लेकिन साथ ही यह भी संकेत देता है कि जनता अब भी बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय विवादों को लेकर परेशान है।सबसे अहम बात यह रही कि शिकायतों की प्रकृति सीधे आमजन के दैनिक जीवन से जुड़ी दिखाई दी। झील का पुरवा निवासी अनिल कुमार श्रीवास्तव द्वारा पेयजल आपूर्ति बाधित होने की शिकायत इस तथ्य को उजागर करती है कि भीषण गर्मी के दौर में पानी केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन का आधार है।जिलाधिकारी ने नगर पालिका को तत्काल कार्रवाई के निर्देश देकर यह स्पष्ट किया कि पेयजल संकट को हल्के में नहीं लिया जा सकता।भूमि विवाद और कब्जे से संबंधित कई शिकायतें भी सामने आईं। मर्दननाका और ग्राम मटौंध के मामलों में भूमिधरी एवं चकरोड की जमीन पर कब्जे की शिकायतें ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते भू-विवादों की तस्वीर प्रस्तुत करती हैं। जिलाधिकारी द्वारा एक सप्ताह के भीतर पैमाइश कराने और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देना प्रशासन की जवाबदेही को दर्शाता है।
ग्राम मतौली की सुनीता द्वारा अधिक विद्युत बिल आने की शिकायत यह बताती है कि बिजली उपभोक्ताओं की समस्याएं आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। जिलाधिकारी ने विद्युत विभाग को त्वरित कार्रवाई के निर्देश देकर राहत दिलाने की कोशिश की। वहीं पचनेही निवासी मान सिंह द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड के नवीनीकरण में हो रही देरी का मुद्दा किसानों की आर्थिक जरूरतों और बैंकिंग व्यवस्था की धीमी प्रक्रिया को सामने लाता है।रास्ता विवाद और मालिकाना हक से जुड़े मामलों ने यह स्पष्ट किया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में राजस्व एवं भूमि संबंधी समस्याएं आज भी सबसे अधिक विवाद का कारण बनी हुई हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन की निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई ही लोगों के विश्वास को मजबूत कर सकती है।
इस दौरान पलाश बंसल ने भी पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतों को सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वहीं नमन मेहता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।स्पष्ट है कि सम्पूर्ण समाधान दिवस केवल शिकायत दर्ज कराने का मंच नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही की परीक्षा भी है। यदि शिकायतों का निस्तारण तय समय सीमा में निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से होता है, तो यही प्रक्रिया जनता और प्रशासन के बीच भरोसे को मजबूत करने का माध्यम बन सकती है।
